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जब बच्चा पहली बार स्कूल जाए माता-पिता क्या करे

जब बच्चा पहली बार स्कूल जाए माता-पिता क्या करे

च्चे में स्कूल के पहले दिन को लेकर डर की भावना होना स्वाभाविक है। लाड़-प्यार के सुरक्षित माहौल से निकलकर जब बच्चा स्कूल के नये वातावरण में जाता है, तो खुद को असुरक्षित महसूस कर सकता है।

अगर माता-पिता पहले से बच्चे को इसके लिए तैयार करें तो बच्चा बिना किसी डर के स्कूल में अपना पहला दिन बिता सकता है।

हर बच्चे का स्कूल में पहला कदम उसके जीवन का सबसे बड़ा और अहम पड़ाव होता है। चाहे वह प्ले स्कूल हो या प्राइमरी स्कूल। शुरुआत में कुछ बच्चे स्कूल जाने को लेकर उत्साहित होते हैं तो कुछ के मन में डर और असुरक्षा की भावना होती है। नये शैक्षणिक सत्र की शुरुआत मार्च अप्रैल में होती है। ऐसे में उन माता-पिता की भूमिका बढ़ जाएगी जिनका बच्चा पहली बार स्कूल जाने वाला है। दरअसल, किसी भी बच्चे का स्कूल में जाना उसके संपूर्ण विकास की दिशा में एक बड़ा कदम होता है, जो आत्मविश्वास को विकसित करने में मदद करता है। इसलिए अभिभावकों को स्कूल भेजने से पहले बच्चों को मानसिक रूप से तैयार करना चाहिए, ताकि उनके मन का डर कम किया जा सके। इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ तरीकों और पहलुओं को बताएंगे जिन्हें अपनाकर आप अपने बच्चे के लिए स्कूल का पहला दिन खूबसूरत बना सकते हैं।

First Day of School Tips in Hindi: दिनचर्या और नींद का संतुलन

यह बहुत ही अच्छा तरीका है कि सेशन शुरू होने के कुछ समय पहले से ही बच्चों की दिनचर्या में बदलाव किया जाए। बच्चे के सोने-जागने का समय समायोजित करना बहुत ही जरूरी है। अक्सर देखा जाता है कि स्कूल जाने के दौरान भी बच्चे उस वक्त जागते रहते हैं जब तक घर के बड़े लोग जागे हुए हैं। ऐसे में देर से सोने और जल्दी जागने से बच्चे की नींद पूरी नहीं होती और सुबह जागने पर वह रोने लगते हैं या फिर क्लासरूम में सोने लगते हैं। शिक्षक भी कई बार इस बात की शिकायत करते हैं कि बच्चे कक्षा में उनींदे रहते हैं। इसलिए स्कूल के शुरू होने से पहले ही बच्चे के सोने और जागने का समय सुनिश्चित करें। यह उनके दिनभर के मूड और ऊर्जा केलिए महत्वपूर्ण है। बच्चे को अपने काम खुद से करने के लिए प्रेरित करें ताकि स्कूल में जाकर वह खुद पानी पी सके और अपना खाना खुद खा सके।

स्कूल के लिए बच्चे के साथ शॉपिंग करें

स्कूल के सामान की लिस्ट बच्चे के साथ बनाएं और उसकी पसंद और नापसंद का ध्यान रखें। लिस्ट को फाइनल करके बच्चे के साथ शॉपिंग पर जाएं। जब बच्चा अपनी पसंद का बैग, बोतल या अन्य सामान चुनता है तो उसके अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है। साथ ही वह यह समझता है कि उसकी पसंद को माता-पिता महत्त्व देते हैं। साथ ही बच्चे की पसंद की सराहना करें।

लंच की तैयारी पहले से करें

स्कूल शुरू होने से पहले बच्चे को विभिन्न प्रकार के भोजन की आदत डालें और उसकी पसंद-नापसंद समझें। ऐसे में आप स्कूल शुरू होने से पहले बच्चे के साथ उसकी पसंद का खाना बनाएं और खाएं। इससे बच्चा स्कूल में जाकर खाने के लिए नखरे नहीं करेगा।

स्कूल का दौरा

स्कूल के गलियारे में नए हौसले और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता नन्हा कदम।

अगर संभव है तो बच्चे को पहले से ही स्कूल का दौरा कराएं। उसमें बच्चे को क्लास, प्ले ग्राउंड, टॉयलेट और टीचर्स से परिचय कराएं। ऐसा करने से बच्चा स्कूल के माहौल से परिचय करता है। वह इस दौरे से समझता है कि उसको स्कूल के अंदर क्या करना है।

ऐसे पहचानें कि बच्चा अत्यधिक तनाव में है

1. लगातार रोना
2. पेट दर्द की शिकायत
3. खाना कम करना
4. सोने में परेशानी
5. असामान्य चुपचाप रहना

स्कूल शुरू होने से पहले शिक्षक से मिलें

ये जरूरी है कि बच्चे को सेशन के शुरू होने से पहले उसकी टीचर से जरूर मिलवाया जाए। दरअसल, छोटे बच्चों को नये लोगों से घुलने मिलने में समय लगता है। ऐसे में आगे बच्चे को स्कूल शुरू होने से पहले उसकी टीचर से मिलवाया जाए तो इससे बच्चे में विश्वास पैदा होता है जो छात्र और शिक्षक का रिश्ता बनाने की दिशा में पहला कदम भी साबित होता है।

स्कूल के पहले दिन से जुड़ी किताबें पढ़कर सुनाएं

बाजार में 'स्कूल के पहले दिन' से जुड़ी बहुत सी ऐसी किताबे हैं जो बच्चे को नये अनुभव के लिए तैयार करती है। वे उन भावनाओं को समझते हैं जिनसे वे गुजरेंगे और कहानी के माध्यम से समाधान भी सीखते हैं। भावनात्मक तैयारी भी है जरूरी सकारात्मक माहौल बनाएं: इसमें मातापिता की भूमिका बहुत अहम है। इसलिए जरूरी है स्कूल के बारे में वह बच्चे से उत्साह और गर्मजोशी से बात करें। उन्हें कहानियां सुनाएं या अपने स्कूल के दिनों की बातें साझा करें।
भावनाओं को स्वीकारें: बच्चे को बताएं कि घबराहट होना सामान्य है। इसको लेकर बहुत ज्यादा परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। इसको लेकर आप बच्चे को किताबें पढ़ा सकते हैं या फिर कोई कहानी सुना सकते हैं।

स्कूल के पहले दिन भावुक बच्ची को प्यार से संभालती और ढाढस बंधाती अध्यापिका।

रोल प्ले करें: ये बहुत ही महत्पूर्ण कदम है क्योंकि बच्चे नई जगह मदद मांगने से या फिर नये बच्चों से मिलने में झिझक महसूस करते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए आप अपने बच्चे को घर पर ही अभ्यास करा सकते हैं, जैसे- नये दोस्त से परिचय देना, शिक्षक से मदद मांगना या कहानी के समय गोल घेरा बनाकर बैठना। याद रखिए, स्कूल का पहला दिन सिर्फ एक शुरुआत नहीं, बल्कि आपके बच्चे की आत्मनिर्भरता की पहली सीढ़ी है। आपका आत्मविश्वास ही उसके आत्मविश्वास की नींव बनेगा। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए अगर आप अपने बच्चे को स्कूल के पहले दिन के लिए तैयार करते हैं तो यह बच्चे के लिए आसान हो जाता है। दरअसल, स्कूल का पहला दिन किसी भी बच्चे के लिए भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इन सभी पहलुओं की जानकारी देकर आप उसके लिए यह दिन आसान और मजेदार बना सकते हैं।

स्कूल के पहले दिन खुशी से दौड़ता बच्चा और उसे निहारते गर्वित माता-पिता।


FAQ
Q. बच्चा पहली बार स्कूल जाने पर बहुत रोता है, क्या करें? A. पहले कुछ दिनों में बच्चे का रोना बिल्कुल स्वाभाविक (Separation Anxiety) है। माता-पिता को स्कूल छोड़ते समय 'क्विक बाय-बाय' कहना चाहिए। ज्यादा देर तक गले लगाने या खुद भावुक होने से बच्चे का रोना और बढ़ जाता है। Q. स्कूल एंग्जायटी (School Anxiety) से बच्चे को बचाने के लिए घर पर क्या तैयारी करें? A. घर पर रोल-प्ले (Role Play) गेम खेलें। बच्चे को सिखाएं कि नए दोस्त कैसे बनाते हैं और टीचर से वॉशरूम जाने के लिए कैसे अनुमति मांगते हैं। इससे उसका सोशल डर खत्म हो जाता है। Q. पहली बार स्कूल जाने वाले बच्चे का स्लीप शेड्यूल कब से बदलना चाहिए? A. नया स्कूल सेशन शुरू होने से कम से कम 10 से 15 दिन पहले से ही बच्चे को रात में जल्दी सुलाने और सुबह जल्दी उठाने की आदत डालनी चाहिए ताकि स्कूल के दिन उसकी नींद पूरी रहे। Q. क्या स्कूल की शॉपिंग में बच्चे को साथ ले जाना सही है? A. हाँ, बिल्कुल। जब बच्चा अपनी पसंद का स्कूल बैग, वॉटर बॉटल या लंच बॉक्स खुद चुनता है, तो उसके भीतर स्कूल जाने का एक पॉज़िटिव उत्साह और उत्सुकता पैदा होती है। Q. अगर बच्चा स्कूल से आने के बाद बिल्कुल चुप रहता है, तो क्या करें? A. बच्चे पर सीधा सवालों का दबाव न बनाएं। उसे थोड़ा आराम करने दें और प्यार से पूछें, "आज स्कूल में सबसे मजेदार बात क्या हुई?" यदि वह फिर भी गुमसुम रहे, तो क्लास टीचर से संपर्क करें।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Grehlakshmi