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कौन हैं सीमा कालीरामणा? 11 महीने पहले बनीं मां, अब कॉमनवेल्थ गेम्स में रचा इतिहास

कौन हैं सीमा कालीरामणा? 11 महीने पहले बनीं मां, अब कॉमनवेल्थ गेम्स में रचा इतिहास

Seema Kaliramna Bronze Medal: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की स्टार डिस्कस थ्रो खिलाड़ी सीमा कालीरामणा ने महिला चक्का फेंक स्पर्धा में 58.65 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।

लेकिन यह उपलब्धि केवल एक पदक या एक शानदार थ्रो तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक मां की जिम्मेदारियां, मातृत्व के बाद दमदार वापसी, पीएचडी की पढ़ाई के साथ खेल का कठिन संतुलन, वर्षों की कड़ी मेहनत और हर चुनौती से लड़ने का अदम्य साहस छिपा है। सीमा की यह कहानी बताती है कि मजबूत इरादों और निरंतर प्रयास से हर मुश्किल को सफलता में बदला जा सकता है।मां बनने के बाद खेलों के मैदान में फिर से कदम रखना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना किसी भी महिला खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता. लेकिन हरियाणा की स्टार एथलीट सीमा ने यह साबित कर दिया कि अगर हौसला मजबूत हो, तो कोई भी जिम्मेदारी आपके सपनों की राह में रोड़ा नहीं बन सकती। बेटे के जन्म के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए एथलेटिक्स से ब्रेक लिया था। लेकिन महज 11 महीने बाद उन्होंने मैदान पर ऐसी दमदार वापसी की कि न सिर्फ राष्ट्रीय चैंपियन बनीं, बल्कि कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया. इस तरह का मानसिक संतुलन और स्टैमिना बनाए रखने के लिए मानसिक तनाव से उबरना सबसे पहली चुनौती होती है।

हरियाणा की बेटी से भारत की शीर्ष डिस्कस थ्रोअर बनने तक

सीमा हरियाणा की बेहतरीन और भरोसेमंद डिस्कस थ्रो खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं. खेल के मैदान में पसीना बहाने के साथ-साथ वह भिवानी स्थित चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय (CBLU) से फिजिकल एजुकेशन में पीएचडी (Ph.D.) भी कर रही हैं। पढ़ाई और स्पोर्ट्स को एक साथ मैनेज करना उनके कड़े अनुशासन को दर्शाता है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला चक्का फेंक स्पर्धा के दौरान थ्रो करती भारतीय डिस्कस थ्रो खिलाड़ी सीमा कालीरामणा। इस मुकाबले में उन्होंने 58.65 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया।

पिता का शुरुआती मार्गदर्शन

सीमा के खेल करियर की नींव उनके घर में ही पड़ी। उनके पिता भारतीय सेना में रह चुके हैं और वे खुद बास्केटबॉल व जैवलिन थ्रो के पूर्व खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने बचपन से ही सीमा को मैदान से परिचित कराया, जो आगे चलकर उनके सफल करियर का आधार बना।

पति ही बने मुख्य कोच

आज सीमा के कोच उनके पति रविंदर कालीरामणा (मोनू कालीरामणा) हैं। रविंदर खुद राष्ट्रीय स्तर के पूर्व डिस्कस थ्रो खिलाड़ी रह चुके हैं। दोनों ने मिलकर सालों तक ट्रेनिंग की और यही अटूट विश्वास सीमा की सफलता का सबसे बड़ा पिलर बना।

भारतीय डिस्कस थ्रो खिलाड़ी सीमा कालीरामणा अपने पति और कोच रविंदर कालीरामणा (मोनू कालीरामणा) के साथ।

11 महीने में 'मदरहुड' से 'मेडल' तक

अपने बेटे रुद्र के जन्म के बाद सीमा ने कुछ समय के लिए एथलेटिक्स से दूरी बनाई थी. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. बेटे की देखभाल, पीएचडी की पढ़ाई और मैदान पर घंटों पसीना बहाकर महज 11 महीने में उन्होंने खुद को फिर से नेशनल चैंपियन के रूप में स्थापित किया। अगर आप भी अपने करियर और वित्तीय लक्ष्यों के लिए स्मार्ट निवेश योजनाओं की तलाश कर रही हैं, तो सीमा का यह सेल्फ-डिसिप्लिन आपके लिए भी एक बड़ी सीख है।

नेशनल गेम्स से ग्लासगो कॉमनवेल्थ तक का सफर

राष्ट्रीय खेल 2025: सीमा ने स्वर्ण पदक जीतकर अपनी स्वर्णिम वापसी दर्ज की।
पर्सनल बेस्ट थ्रो: भुवनेश्वर में आयोजित नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 59.73 मीटर का थ्रो कर अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: इसी बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर उन्होंने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालिफाई किया और कांस्य पदक अपने नाम किया।
इससे पहले भी सीमा यूथ एशियन चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं।

बेटे से दूर रहने की पीड़ा

ग्लासगो में मेडल जीतने के बाद सीमा काफी भावुक हो गईं। उन्होंने अपने बेटे को साथ न ला पाने का दर्द साझा करते हुए कहा,"मेरा बेटा बार-बार कह रहा था कि उसे भी साथ ले चलूं, लेकिन परिस्थितियों के कारण मैं उसे साथ नहीं ला सकी। एक मां के लिए यह बेहद दर्दभरा पल है, जिसे आप एक मां का बड़ा त्याग भी कह सकते हैं।"


FAQ
Q. सीमा अंतिल / कालीरामणा कौन सा खेल खेलती हैं? A. सीमा भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्टार डिस्कस थ्रो (Discus Throw) एथलीट हैं. Q. मां बनने के कितने समय बाद सीमा ने मैदान पर वापसी की? A. बेटे रुद्र के जन्म के महज 11 महीने बाद सीमा ने मैदान पर वापसी कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक जीते. Q. सीमा के कोच कौन हैं? A. सीमा के पति रविंदर कालीरामणा (मोनू कालीरामणा) उनके मुख्य कोच हैं, जो खुद भी पूर्व राष्ट्रीय डिस्कस थ्रो खिलाड़ी रह चुके हैं. Q. ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए सीमा ने कितना दूर डिस्कस थ्रो किया था? A. उन्होंने नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 59.73 मीटर का पर्सनल बेस्ट थ्रो करके कॉमनवेल्थ के लिए क्वालीफाई किया था. Q. सीमा ने अपना कॉमनवेल्थ मेडल किसे समर्पित किया? A. सीमा ने अपना पदक अपने पति और कोच रविंदर कालीरामणा के लगातार समर्थन और मार्गदर्शन को समर्पित किया.

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