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क्या हैं वो 8 सिद्धियां और 9 निधियां जो बनाती हैं हनुमान जी को अद्वितीय?: Siddhi and Nidhi of Hanuman Ji

क्या हैं वो 8 सिद्धियां और 9 निधियां जो बनाती हैं हनुमान जी को अद्वितीय?: Siddhi and Nidhi of Hanuman Ji

Flower for Hanuman Ji: जब भी ज़िंदगी में कोई मुश्किल आती है तब एक नाम सबसे पहले याद आता है वो नाम है भगवान हनुमान का। उन्हें हम संकट मोचक कहते हैं, क्योंकि वो हर परेशानी से हमें बाहर निकालने का रास्ता दिखाते हैं।

हनुमान जी को कई नामों से जाना जाता है जैसे बजरंगबली, अंजनी पुत्र और श्रीराम के सबसे बड़े भक्त। हर साल उनका जन्मदिन हनुमान जयंती के रूप में पूरे देश में बड़ी श्रद्धा और जोश के साथ मनाया जाता है। माना जाता है कि हनुमान जी को माता सीता ने अष्ट सिद्धि और नव निधि का वरदान दिया था, जिससे वो आज भी अपने भक्तों को शक्ति और हिम्मत देते हैं।

कैसे मिली अष्ट सिद्धियां और नव निधियां?

हनुमान चालीसा में हनुमान जी की ताकत और चमत्कारी शक्तियों का बहुत सुंदर तरीके से ज़िक्र किया गया है। एक मशहूर चौपाई है, "अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस वर दीन्ह जानकी माता"। इसका मतलब है कि हनुमान जी को आठ तरह की सिद्धियाँ और नौ तरह की निधियाँ यानी खज़ाने का आशीर्वाद माता सीता ने दिया था।

ऐसा माना जाता है कि जब हनुमान जी लंका में माता सीता से मिले और श्रीराम का संदेश उन्हें दिया, तब माता सीता बहुत खुश हुईं और उन्होंने ये वरदान हनुमान जी को दिया। तभी से भक्त मानते हैं कि जो सच्चे मन से हनुमान जी की भक्ति करता है, उसे ताकत, समझदारी और समृद्धि जरूर मिलती है।

हनुमान जी की वो 8 चमत्कारी शक्तियाँ

  1. अणिमा - खुद को बहुत छोटा बना लेना
    हनुमान जी के पास ये ताकत थी कि वो अपने शरीर को इतना छोटा कर सकते थे कि कोई उन्हें देख ही न पाए। जैसे लंका में उन्होंने एकदम छोटा रूप ले लिया था ताकि किसी को पता भी न चले।
  2. महिमा - शरीर को बहुत बड़ा कर लेना
    ये शक्ति हनुमान जी को इतनी बड़ी काया देने की ताकत देती थी कि वो पहाड़ों जितने विशाल दिख सकते थे। उन्होंने कई बार युद्ध के समय अपना विराट रूप दिखाया।
  3. गरिमा - खुद को बहुत भारी बना लेना
    इस शक्ति से हनुमान जी खुद को इतना भारी कर सकते थे कि कोई भी उन्हें हिला नहीं सकता था। ये ताकत उनके स्थिर और मजबूत होने का प्रतीक है।
  4. लघिमा - खुद को बहुत हल्का बना लेना
    इस सिद्धि से हनुमान जी अपने शरीर को इतना हल्का बना लेते थे कि वो बिना किसी रुकावट के उड़ सकते थे, जैसे हवा में उड़ते पक्षी।
  5. प्राप्ति - जो चाहो वो तुरंत पा लेना
    इस शक्ति से हनुमान जी को जो भी चाहिए होता था, वो तुरंत मिल जाता था। उन्हें कहीं भी जाना हो, तो तुरंत पहुंच जाते थे - चाहे वो कितना भी दूर क्यों न हो।
  6. प्राकाम्य - प्रकृति पर काबू पाना
    इस सिद्धि से हनुमान जी को पानी, हवा, आग जैसी प्राकृतिक चीज़ों पर भी नियंत्रण मिल जाता था। वो चाहें तो इनसे कुछ भी करवा सकते थे।
  7. ईशित्व - दूसरों पर असर डालने की ताकत
    इस शक्ति से हनुमान जी में ये ताकत थी कि वो किसी को भी अपने वश में कर सकते थे, चाहे वो कितना भी ताकतवर क्यों न हो।
  8. वशित्व - खुद की इंद्रियों और मन पर नियंत्रण
    हनुमान जी इस शक्ति की मदद से अपने गुस्से, इच्छाओं और मन को पूरी तरह से कंट्रोल में रख सकते थे। यही वजह है कि वो हमेशा शांत और एकाग्र रहते थे।

क्या है हनुमान जी की नौ निधियां

श्री हनुमान जी को सिर्फ ताकत, बुद्धि और भक्ति के लिए ही नहीं पूजा जाता, बल्कि वो नौ निधियों यानी नौ तरह की दिव्य संपत्तियों के स्वामी भी माने जाते हैं। मान्यता है कि ये नौ निधियां हनुमान जी को माता सीता ने आशीर्वाद स्वरूप दी थीं।

'निधि' का मतलब होता है - ऐसी दौलत या ऊर्जा जो न सिर्फ पैसे की, बल्कि सोच, आत्मविश्वास और मन की ताकत भी बढ़ाए। ये नौ निधियां हैं पद्म, महापद्म, शंख, मकर, कच्छप, मुकुंद, नंद, नील और खर्जूरवा।

हर निधि अलग-अलग तरह की शक्ति और समृद्धि का प्रतीक है। हनुमान जी की ये निधियां बताती हैं कि अगर सच्चे मन से उनकी भक्ति की जाए, तो इंसान को जीवन के हर क्षेत्र में तरक्की मिलती है चाहे वो पैसा हो, मन की शांति हो या आत्मिक सुख। यही वजह है कि लोग उन्हें संकट मोचन कहकर पुकारते हैं।

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