गृहलक्ष्मी पॉडकास्ट में ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. कल्पना नागपाल की विजया मिश्रा से खर्राटे अथवा स्लिप एपिनया पर हुई बातचीत के मुख्य अंश इस लेख में पढ़ें।
अक्सर हम सिरदर्द या बुखार होने पर तो तुरंत डॉक्टर के पास भागते हैं, लेकिन खर्राटे लेने या गले की मामूली खराश को नजरअंदाज कर देते हैं हमारे शरीर के तीन सबसे महत्वपूर्ण अंग- नाक, कान और गला (ENT) प्रदूषण और बदलती जीवनशैली के कारण सबसे पहले प्रभावित होते हैं।
इसी विषय पर गहराई से चर्चा करने के लिए हमारे साथ हैं, वह न केवल एक कुशल सर्जन हैं, बल्कि ईएनटी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए देशभर में जानी जाती हैं। उनके साथ हुई इस खास बातचीत के अंश आपकी सेहत के लिए जीवन बचाने वाले साबित हो सकते हैं।
Sleep Apnea and Snoring Symptoms in Hindi: 1. ईएनटी क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
पति के खर्राटों से परेशान पत्नी की उड़ गई रातों की नींद।ईएनटी का मतलब है इयर, नोज और थ्रोट। ये तीनों अंग आपस में एक संकीर्ण नली के जरिए जुड़े होते हैं। नाक हमें सांस लेने और गंध पहचानने में मदद करती है, कान सुनने और शरीर का संतुलन बनाए रखने का काम करते हैं, और गला हमें बोलने और निगलने की शक्ति देता है। इनमें से किसी भी एक अंग में संक्रमण होने पर उसका सीधा असर बाकी दोनों पर भी पड़ता है। इसलिए इन्हें 'शरीर का द्वार' कहा जाता है, जहां से हवा और भोजन हमारे भीतर प्रवेश करते हैं।
2. स्लीप एपिनया : खर्राटों के पीछे छिपा जानलेवा खतरा
क्या आपके पार्टनर रात को जोर-जोर से खर्राटे लेते हैं? इसे हल्के में लेना जानलेवा हो सकता है। स्लीप एपिनया एक ऐसी स्थिति है जिसमें सोते समय सांस लेने की नली बार-बार बंद हो जाती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिर जाता है। इससे सोते समय अचानक दिल का दौरा (हार्ट अटैक) या ब्रेन स्ट्रोक आने का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप दिनभर थकान महसूस करते हैं या सोते समय अचानक सांस रुकने से जाग जाते हैं, तो यह स्लीप एपिनया का लक्षण हो सकता है।
3. प्रदूषण और हमारी नाक: एक गंभीर संकट
आज के दौर में दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों में बढ़ता प्रदूषण हमारे नाक के अंदरूनी हिस्सों को खोखला कर रहा है। हवा में मौजूद पीएम 2.5 कण नाक की झिल्ली को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे साइनस, एलर्जी और जुकाम की समस्या स्थायी बन जाती है। नाक बंद रहने से हम मुंह से सांस लेना शुरू कर देते हैं, जिससे फेफड़ों तक बिना फिल्टर हुई गंदी हवा पहुंचती है। इससे बचने के लिए घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग और नियमित रूप से जल-नेति या नेजल स्प्रे का डॉक्टर की सलाह पर उपयोग करना चाहिए।
4. गले में खराश और बार-बार होने वाली सूजन
गले की किसी भी समस्या को न करें नजरअंदाज, तुरंत ईएनटी डॉक्टर से परामर्श लें।गले में खराश होना एक आम बात लग सकती है, लेकिन अगर यह समस्या 2 हफ्ते से ज्यादा बनी रहे, तो यह टॉन्सिलाइटिस या किसी गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकती है। बार-बार ठंडी चीजें खाने, प्रदूषण और एसिडिटी के कारण गले में सूजन आ जाती है। कभी-कभी यह गले के कैंसर का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है, इसलिए इसे 'घरेलू नुस्खों' के भरोसे छोड़ने के बजाय विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।
5. कान का वैक्स: सफाई के चक्कर में न करें ये गलती
हम में से ज्यादातर लोग कान साफ करने के लिए 'ईयर बड्स' या माचिस की तीली का इस्तेमाल करते कान में बनने वाला वैक्स (मैल) दरअसल एक सुरक्षा कवच है, जो धूल-मिट्टी को कान के पर्दे तक जाने से रोकता है। ईयर बड्स का इस्तेमाल करने से यह वैक्स और अंदर धंस जाता है, जिससे पर्दे को नुकसान पहुंच सकता है या सुनने की क्षमता कम हो सकती है। कान की सफाई हमेशा किसी विशेषज्ञ से ही करवानी चाहिए।
6. थायराइड की नई रोबोटिक सर्जरी: बिना किसी दाग के इलाज
आधुनिक रोबोटिक तकनीक से अब थायराइड की सर्जरी हुई और भी सुरक्षित तथा आसान।थायराइड की गांठ होने पर पहले गले पर एक लंबा कट लगाया जाता था, जिसका निशान ताउम्र बना रहता था। डॉ. कल्पना नागपाल ने बताया कि अब आधुनिक चिकित्सा में रोबोटिक और एंडोस्कोपिक सर्जरी आ गई है। इस तकनीक में बिना गला चीरे, बगल या मुंह के अंदर से सर्जरी की जाती है। इससे मरीज को न तो दर्द होता है और न ही गले पर कोई निशान बचता है। यह उन महिलाओं के लिए वरदान है जो दाग-धब्बे रहित इलाज चाहती हैं।
7. गले की गांठें: कब होना चाहिए सावधान
गले के बाहर या अंदर महसूस होने वाली किसी भी तरह की गांठ को नजरअंदाज न करें। डॉ. नागपाल के अनुसार, गले की गांठें साधारण सूजन से लेकर लिम्फोमा या कैंसर तक हो सकती हैं। अगर गांठ का आकार बढ़ रहा हो, दर्द न हो रहा हो, या आवाज में भारीपन आ गया हो, तो तुरंत ईएनटी सर्जन से मिलना चाहिए। बायोप्सी और एफएनएसी जांच के जरिए समय रहते इसका सही पता लगाया जा सकता है।
8. क्या अनुलोम-विलोम साइनस का स्थायी इलाज है?
योग हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन डॉ. नागपाल का मानना है कि केवल योग से शारीरिक अवरोध जैसे कि नाक की हड्डी का टेढ़ा होना, ठीक नहीं किया जा सकता। अनुलोम-विलोम सांस लेने की प्रक्रिया को सुधारता है और एलर्जी को कम करता है, लेकिन अगर साइनस में मवाद भरा हो या हड्डी बढ़ गई हो, तो डॉक्टरी इलाज या छोटी सर्जरी ही एकमात्र रास्ता बचता है।
9. ईएनटी स्वास्थ्य के लिए जरूरी सालाना चेकअप
जैसे हम फुल बॉडी चेकअप कराते हैं, वैसे ही नाक, कान और गले की जांच भी साल में एक बार जरूर करानी चाहिए। इसमें हियरिंग टेस्ट, एंडोस्कोपी और थायराइड लेवल की जांच शामिल है। डॉ. नागपाल के अनुसार, 40 की उम्र के बाद महिलाओं को थायराइड फंक्शन टेस्ट हर 6 महीने या सालभर में कराना चाहिए, क्योंकि महिलाओं में थायराइड असंतुलन की संभावना अधिक होती है।
10. घरेलू उपचार और आधुनिक चिकित्सा का संतुलन
अदरक-तुलसी की चाय या गरारे गले के लिए अच्छे हैं इसलिए जब संक्रमण बढ़ जाए तो एंटीबायोटिक्स या विशेषज्ञ की सलाह लेना अनिवार्य है। कान में कभी भी गर्म तेल या कोई तरल पदार्थ न डालें। अपनी सेहत के प्रति जागरूक बनें और 'गूगल डॉक्टर' के बजाय असली डॉक्टर पर भरोसा करें। नाक, कान और गला हमारे जीवन की गुणवत्ता तय करते हैं। इन बातों पर अमल करके आप न केवल बीमारियों से बच सकते हैं, बल्कि एक स्वस्थ और सक्रिय जीवन भी जी सकते हैं।
आभार: (ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. कल्पना नागपाल इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में सीनियर कंसल्टेंट हैं और उन्हें 'रोबोटिक हेड एंड नेक सर्जरी' में महारत हासिल है।)
FAQ
Q. खर्राटे लेना (Snoring) स्लीप एपनिया का संकेत कब माना जाता है? A. जब खर्राटों के साथ सोते समय अचानक सांस रुकने लगे, दम घुटने जैसी स्थिति बने और दिनभर थकावट महसूस हो, तो यह स्लीप एपनिया (Sleep Apnea) का स्पष्ट लक्षण है। Q. क्या कान की सफाई के लिए कॉटन बड्स (Ear Buds) का इस्तेमाल सुरक्षित है? A. बिल्कुल नहीं। कॉटन बड्स का इस्तेमाल करने से कान में मौजूद मोम (Ear Wax) और अंदर चला जाता है, जिससे कान के पर्दे को नुकसान पहुंच सकता है और सुनने की क्षमता कम हो सकती है। Q. बिना गले पर निशान के थायराइड सर्जरी (Scarless Thyroid Surgery) कैसे संभव है? A. रोबोटिक हेड एंड नेक सर्जरी तकनीक के जरिए बगल (Axilla) या मुंह के अंदर से थायराइड की गांठ निकाली जाती है, जिससे गले पर कोई कट या दाग नहीं बनता। Q. क्या अनुलोम-विलोम प्राणायाम से साइनस (Sinus) का स्थायी इलाज हो सकता है? A. अनुलोम-विलोम से सांस लेने में आसानी होती है, लेकिन यदि नाक की हड्डी (Nasal Septum) टेढ़ी हो या मवाद भरा हो, तो सर्जरी या डॉक्टरी इलाज ही एकमात्र विकल्प है। Q. गले में खराश या सूजन रहने पर कैंसर का खतरा कब होता है? A. यदि गले में दर्द रहित गांठ बन रही हो, आवाज में २ हफ्ते से ज्यादा भारीपन रहे या निगलने में तकलीफ हो, तो तुरंत बायोप्सी जांच करानी चाहिए।

