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मानसून में आइब्रो थ्रेडिंग या वैक्सिंग? जानिए कौन-सा विकल्प है ज्यादा सुरक्षित

मानसून में आइब्रो थ्रेडिंग या वैक्सिंग? जानिए कौन-सा विकल्प है ज्यादा सुरक्षित

Eyebrow Threading vs Waxing: बारिश का मौसम शुरू होते ही अधिकांश महिलाएं अपने ग्रूमिंग रूटीन को अपडेट करती हैं। आइब्रो शेपिंग भी इसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आमतौर पर आइब्रो को शेप देने के लिए दो तरीके सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं - थ्रेडिंग और वैक्सिंग।

लेकिन मानसून के मौसम में बढ़ती नमी, पसीना और बैक्टीरिया की सक्रियता के कारण त्वचा संक्रमण का जोखिम भी बढ़ जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आइब्रो के लिए कौन-सा विकल्प अधिक सुरक्षित है? आइए जानते हैं नई दिल्ली स्थित दादू मेडिकल सेंटर की फाउंडर व चीफ डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ निवेदिता दादू से इस बारे में।

थ्रेडिंग से कैसे प्रभावित होती है त्वचा?

थ्रेडिंग में सूती धागे की मदद से बालों को जड़ से हटाया जाता है। यह एक सटीक तकनीक है और आइब्रो को मनचाहा आकार देने के लिए काफी लोकप्रिय है। हालांकि, यदि इस्तेमाल किया गया धागा साफ न हो या तकनीशियन के हाथों की स्वच्छता का ध्यान न रखा जाए, तो त्वचा पर सूक्ष्म कट या माइक्रो ट्रॉमा हो सकता है। इन छोटे-छोटे घावों के माध्यम से बैक्टीरिया त्वचा में प्रवेश कर सकते हैं।

संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में थ्रेडिंग के बाद लालिमा, जलन या छोटे दाने दिखाई दे सकते हैं। मानसून के दौरान अत्यधिक पसीना इन समस्याओं को और बढ़ा सकता है।

वैक्सिंग में क्या हैं जोखिम?

आइब्रो वैक्सिंग में गर्म या कोल्ड वैक्स का उपयोग करके बालों को हटाया जाता है। यह प्रक्रिया तेज होती है, लेकिन चेहरे की नाजुक त्वचा के लिए हमेशा उपयुक्त नहीं मानी जाती है। वैक्स त्वचा की ऊपरी परत को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे त्वचा कुछ समय के लिए अधिक संवेदनशील हो जाती है। यदि वैक्सिंग के बाद त्वचा की सही देखभाल न की जाए, तो बैक्टीरियल संक्रमण, फॉलिकुलाइटिस (हेयर फॉलिकल इंफेक्शन) या एलर्जिक रिएक्शन का खतरा बढ़ सकता है।

मानसून में आइब्रो थ्रेडिंग और वैक्सिंग के बीच सही विकल्प चुनना त्वचा की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। साफ-सफाई का ध्यान रखने से बैक्टीरियल इंफेक्शन के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

मानसून में नमी अधिक होने के कारण त्वचा पर बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनप सकते हैं। ऐसे में वैक्सिंग के बाद खुले हुए पोर्स संक्रमण के लिए अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।

मानसून में कौन सा विकल्प बेहतर है?

सामान्य परिस्थिति में आइब्रो के लिए थ्रेडिंग अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प मानी जाती है क्योंकि इसमें किसी रसायन या गर्म वैक्स का उपयोग नहीं होता। हालांकि, सुरक्षा इस बात पर भी निर्भर करती है कि प्रक्रिया कितनी स्वच्छ परिस्थितियों में की जा रही है। यदि सैलून में साफ धागे, सैनिटाइज्ड उपकरण और उचित हाइजीन का पालन किया जाता है, तो संक्रमण का जोखिम काफी कम किया जा सकता है।

सैलून में आइब्रो ग्रूमिंग की दो विधियों का तुलनात्मक चित्रण: बाएँ थ्रेडिंग द्वारा सटीक आकार, और दाएँ वैक्सिंग द्वारा बालों को हटाना।

दूसरी ओर, जिन लोगों की त्वचा बहुत संवेदनशील है, जिन्हें एक्टिव एक्ने हैं या जो रेटिनॉल एवं एक्सफोलिएटिंग ट्रीटमेंट्स का उपयोग कर रहे हैं, उन्हें वैक्सिंग से अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

संक्रमण से बचने के लिए अपनाएं ये सावधानियां

* केवल साफ-सुथरे और विश्वसनीय सैलून का चुनाव करें।

* प्रक्रिया से पहले और बाद में हाथों से आइब्रो क्षेत्र को बार-बार न छुएं।

* थ्रेडिंग या वैक्सिंग के तुरंत बाद भारी मेकअप लगाने से बचें।

* यदि त्वचा पर लालिमा या जलन हो तो त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लें।

* प्रक्रिया के बाद त्वचा को साफ और सूखा रखें।

मानसून के मौसम में बढ़ती नमी और बैक्टीरिया के कारण त्वचा संक्रमण का खतरा सामान्य दिनों की तुलना में अधिक होता है। आइब्रो शेपिंग के लिए थ्रेडिंग आमतौर पर वैक्सिंग की तुलना में अधिक सुरक्षित विकल्प मानी जाती है, बशर्ते स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जाए।

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FAQ
Q. क्या मानसून में आइब्रो थ्रेडिंग के बाद दाने निकल सकते हैं? A. हाँ, नमी और पसीने के कारण बैक्टीरिया पनपने से दाने हो सकते हैं। Q. क्या सेंसिटिव स्किन के लिए वैक्सिंग सुरक्षित है? A. मानसून में वैक्सिंग से बचना चाहिए क्योंकि इससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। Q. थ्रेडिंग के बाद जलन क्यों होती है? A. अगर धागा साफ न हो या स्किन बहुत ड्राई हो, तो जलन हो सकती है। Q. क्या थ्रेडिंग के बाद एलोवेरा जेल लगा सकते हैं? A. जी हाँ, यह जलन कम करने में मदद करता है। Q. कितनी बार आइब्रो करवानी चाहिए? A. यह बालों की ग्रोथ पर निर्भर करता है, आमतौर पर 2-3 हफ्ते में।

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