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नेपोटिज्म-गृहलक्ष्मी की कहानियां

नेपोटिज्म-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Motivational Story: सुनील एक गांव का लड़का जो कि बी. ए. पास था और उसके मां बाप ने जीवन बहुत ग़रीबी में बिताया था दूसरे के खेतों में काम करके जो मिलता उसी से घर चलता था , उसी थोड़ी सी पूंजी में पेट काट के किसी तरह बड़े बेटे सुनील को इतना ही पढ़ा पाए थे और बी. ए.

पस करते ही सुनील के ऊपर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी अब सुनील कोई अच्छी नौकरी करने लगे तो घर में सबको पेट भर खाना मिलने सके, इसी लिए पूरे परिवार की आंखें सुनील पर ही टिकी रहती थी , बी. ए. पास लड़का जो गांव से बहुत सारे सपने आंखों में लिए शहर आता है इस उम्मीद से अब अच्छी नौकरी मिल जाएगी तो ये संकट के दिन दूर हो जाएंगे , सुनील एक बड़ी कंपनी में अपनी किस्मत आज़माना चाहता है, वो प्रयास भी शुरू कर दिया था। सुनील बहुत ही प्रतिभाशाली व्यक्ति क्योंकि पढ़ाई के साथ सुनील कंप्यूटर भी जानता था इंग्लिश में भी ठीक था । कंपनी में इंटरव्यू देने के लिए जब सुनील पहुंचा तो उसके साथ कई और लोग भी इंटरव्यू देने पहुंचे थे, जो ऐसा लगता था कि आवारा टाइप के हैं। क्योंकि बिना वजह ऑफिस के चपरासी से भीड़ गए थे उसको बहुत बुरा भला बोलकर बेइज्जती भी कर रहे थे क्योंकि वो चपरासी गरीब है इस लिए अपने पैसे का रुआब दिखा रहे थे। सुनील का और सबका इंटरव्यू हुआ सभी सवाल के जवाब सुनील ने दिए बाकी लोगों से सवाल भी नहीं पूछा गया बस उनको बुला के बैठा लिया गया चाय अलग से पिलाई गई नाम पूछने पे पता चला जो दो लड़के और इंटरव्यू के लिए आए h उनमें से एक का नाम रोहन और दूसरे का रवि , तीसरा सुनील जो कि बहुत गरीब लड़का गांव से आया था और एक लड़का लड़का सुधीर जो कि सुनील की ही तरह गांव से आया था अपनी डिग्री हाथों में और आंखों में परिवार की गरीबी मिटाने के सपने लेकर । लेकिन रवि , और रोहन बहुत अमीर थे उनके पहनावे और उनके बातों से लग रहा था। उनके पिता या परिवार के सदस्य कंपनी में काम कर रहे है ऐसा उनकी बातों से पता चल रहा था क्योंकि जो भी ऑफिस के चतुर्थ श्रेणी के व्यक्ति को वो देखते तो उसको गरीबी के नाम पर गाली देते थे। रवि और रोहन की बातों से लग रहा था कि अपने काम को पूरा करने के लिए उनको मेहनत करने के बजाय अपने पारिवारिक संबंधों का फायदा मिल जाता है।
क्योंकि उनके पिता बहुत अमीर हैं, वहीं,सुनील अपनी प्रतिभा के बावजूद, लगातार पीछे फेंक दिया जाता है , क्योंकि उसके पास कोई बड़ा कनेक्शन नहीं है, उसे एक कंप्यूटर मालिक ने यह भी कहा था, "तुम एक प्रतिभाशाली लड़के हो, लेकिन तुम्हे नौकरी इस लिए नहीं मिल सकती क्योंकि तुम स्मार्ट नहीं हो । बाहर निकल कर पता चला कि उन्होंने उस नौकरी में पहले ही अपने भाई के बेटे को रख लिया था।
इस अनुभव ने सुनील को बहुत निराश कर दिया था उसे एहसास हुआ कि नौकरी सिर्फ प्रतिभा पर आधारित नहीं है बल्कि एक बेरोज़गार लड़के के रूप में, उसे यह भी समझ में आया कि नेपोटिज़्म ने उसके जैसे जाने कितने प्रतिभाशाली लोगों को पीछे धकेल दिया है, जबकि कम प्रतिभाशाली लोग आगे बढ़ रहे हैं ,आज इस कंपनी में भी इंटरव्यू के बाद नेपोटिज़्म की झलक दिखाई दे रही थी,लेकिन सुनील को भरोसा था कि इंटरव्यू इतना अच्छा गया है बॉस खुद कह रहे थे के सुनील यू आर वेरी टैलेंटेड । की यहां नौकरी सुनील को ही मिलेगी सबको तो इंटरव्यू के दौरान ही डांट पड़ गई थी इंटरव्यू लेने वाले सर लोगों से। अब बस इंतजार था सलेक्शन का जिसका परिणाम एक घंटे में आना था एक घंटा हो चुका था , एक ऑफिस का स्टाफ आकर बोलता है रोहन, रवि यू आर सलेक्टेड वेरी कांग्रेचुलेशन।

सुनील की तो जैसे जमीन ही निकल गई आंखों में आंसू लिए सुनील डिग्री हाथों में दबाए धम्म से बैठ गया। ऑफिस के प्यून ने आकर बताया कि भैया रो मत यहां सब भाई भतीजावाद है अपने ही भी लोगों को रखते है नौकरी में , इंटरव्यू तो इस लिए कराते हैं कि बाद में कोई बाहर विरोध न कर सके। बहुत काबिल होने के बाद भी सुनील नेपोटिज्म के कारण फिर से बेरोज़गार सुनील गीली आंखों से किराए के कमरे में लौट आया और बिना खाए छत की तरफ देखते हुए सोचता रहा कि नेपोटिज्म के कारण जाने कितने लोग ये दर्द झेलते होंगे जो मैं झेल रहा हूं।

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