Bharatpur Kachori:पक्षियों के कलरव के लिए मशहूर राजस्थान का भरतपुर शहर बर्ड वॉचर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं। यहां के घना पक्षी विहार में साइबेरियाई सारस, राजहंस, सुरखाब, और पेंटेड स्टॉर्क जैसे 360 से अधिक प्रजातियों के देशी और प्रवासी पक्षी आते हैं।
इन पक्षियों को देखने के लिए विदेशी और देसी पर्यटक भारी तादाद में आते हैं। लेकिन स्वाद के शौकीनों के लिए भी इस शहर में स्वादिष्ट और करारी हींग की कचौरियां मौजूद है। यहां के स्थानीय निवासी सुबह के नाश्ते में कचौरी खाना पसंद करते हैं।
हैरानी होगी जानकर कि इस शहर को भारत का कचौरी कैपिटल कहा जाता है। यहां की हींग की कचौरी का तो कोई जवाब ही नहीं। इस शहर के बारे में कहा जाता है कि पक्षी भी दाना चुगने से पहले हींग की खुशबू सूंघते हैं। अगर आप यहां अल सुबह पहुंचेंगे तो हींग और सिंकते हुए बेसन की महक से अंदाजा लगा पाएंगे कि आप भारत के कचौरी कैपिटल में पहुंच चुके हैं।
आलू की सब्जी के साथ कचौरी
भरतपुर में यहां की कचौरी का स्वाद आपको थोड़ा अलग लगेगा। यहां कचौरी दही और हरी चटनी और इमली की चटनी के साथ नहीं परोसी जाती। बल्कि मसालेदार आलू या छोले की तीखी सब्जी के साथ खस्ता कचौरी का आनंद ले सकते हैं। यहां की कचौरियों का करारापन और हाथ से कुटे हुए मसालों का मिश्रण इसे लाजवाब बनाता है। पत्ते के दोनों में इन कचौरियों की एक अलग ही खुशबू आती है। आलू की कचौरी के साथ यहां दाल और प्याज की कचौरी भी मशहूर है।
मसाला चाय और जलेबी करें ट्राई
बेशक अब शहरों में जनसंख्या बड़ रही है। लेकिन अगर किसी शहर को करीब से देखना हो तो पुराने बसे हुए शहर में उस जगह का स्वाद और संस्कृति को महसूस किया जा सकता है। भरतपुर के साथ भी ऐसा ही है। यहां आप स्टेशन रोड पर देवी राम कचौड़ी, गोपाल कचौरी, कुम्हेर गेट पर पंडित जी कचौरी और लजीज कचौरी का आनंद ले सकते हैं। एक और बात अगर आप चाय के शौकीन हैं तो कचौरी खाने के बाद मसाला चाय और गरम जलेबी का आनंद लें।
पक्षियों को निहारने के साथ कचौरी का आनंद
अब अगर आप घना पक्षी विहार आने की प्लानिंग कर रहे हैं तो शहर के इस स्थानीय जायके का भी आनंद लें। सुबह छह बजे से यहां कचौरी मिलनी शुरु हो जाती है। आप नाश्ते का आनंद लें और दूरबीन लेकर निकल पड़े घना पक्षी विहार जहां पक्षी अपने कलरव से आपको मोहपाश में बांध लेने का हुनर रखते हैं। अगर मानसून में आ रहे हैं तो सारस क्रेन, पेंटेड स्टॉर्क, ओपन-बिल्ड स्टॉर्क, ग्रे हेरॉन, पर्पल हेरॉन आपका इंतजार कर रहे हैं।
स्वाद से जान लीजिए शहर की तासीर
यह सच है कि हर शहर में कचौरियां मिलती हैं। लेकिन हर शहर का स्वाद अलग होता है। भरतपुर को ही देख लें। यहां की कचौरियों का तीखा स्वाद आपकी चटोरी जुबान को पसंद आएगा। इसलिए अगली बार जब आप केवलादेव में पक्षियों के शॉट्स लेने का प्लान बनाएं, तो सुबह की शुरुआत शहर के इस स्थानीय नाश्ते के साथ करें। फूड लवर्स की मानें तो अगर भरतपुर आकर यहां की कचौरी नहीं खाई, तो समझिए आपका भरतपुर दौरा अभी अधूरा ही है!
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FAQ
Q. भरतपुर की कचौरी राजस्थान की अन्य कचौरियों (जैसे जोधपुर या कोटा) से अलग कैसे है? A. भरतपुर की कचौरी में हींग और खड़े मसालों का तेज़ और अनोखा तड़का होता है। सबसे बड़ा अंतर यह है कि यहाँ कचौरी के साथ कोई मीठी सोंठ या दही नहीं दी जाती, बल्कि इसे केवल तीखी और चटपटी आलू-छोले की रसेदार सब्जी के साथ परोसा जाता है। Q. भरतपुर की सबसे प्रसिद्ध कचौरी की दुकानें कौन-सी हैं? A. भरतपुर में कचौरी के लिए कई पुरानी और लोकप्रिय दुकानें हैं, जिनमें प्रमुख हैं:देवीराम कचौरी वाले (स्टेशन रोड) भोला कचौरी वाले (बिजली घर चौराहे के पास)पंडित जी कचौरी वाले (कुम्हेर गेट)गोपाल कचौरी वाला (तारा महेंद्र कॉलोनी) Q. भरतपुर में कचौरी खाने का सबसे बेहतरीन समय क्या है? A. कचौरी खाने का सबसे सही समय सुबह 6:30 बजे से 10:00 बजे के बीच का होता है। इस समय कढ़ाइयों से गरम-गरम और ताज़ा खस्ता कचौरियाँ निकलती हैं। Q. भरतपुर में कचौरी के साथ क्या-क्या परोसा जाता है? A. पत्ते के दोने में खस्ता कचौरी को फोड़कर उसमें गरमा-गरम तीखी आलू-छोले की सब्जी डाली जाती है। ऊपर से कटी हुई हरी मिर्च और बारीक अदरक का लच्छा डाला जाता है। कचौरी का तीखापन शांत करने के लिए इसके साथ गरम-गरम रसदार जलेबी खाने का रिवाज है। Q. क्या भरतपुर बर्ड सेंचुरी (केवलादेव नेशनल पार्क) के पास कचौरी मिलती है? A. हाँ, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के आसपास और भरतपुर शहर के लगभग हर मुख्य चौराहे पर कचौरी के स्टॉल और दुकानें आसानी से मिल जाती हैं।

