क्या आप उन माता-पिता में से हैं जिन्हें अपने बच्चों के साथ बिताये हर 'स्पेशल मोमेंट' को सोशल मीडिया पर शेयर करना अच्छा लगता है। यदि आप ऐसा करते आए हैं तो तस्वीरें फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप स्टेट्स में लगाने से पहले इन बातों को जान और समझ लें।
इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप स्टेट्स पर हम दुनिया को यह दिखा देना चाहते हैं कि हम कितने अच्छे माता-पिता हैं, हमारी पेरेंटिंग दूसरों से हटके है। इसलिए हम अपने बच्चों के साथ बिताये हर पल को कैप्चर कर उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में साझा कर देना चाहते हैं। सोशल मीडिया में वायरल हो जाने का इतना जूनून है लोगों पर कि कुछ तो इस बात पर भी नाराज हो जाते हैं कि आपने उनके बच्चे की फोटो को लाइक नहीं किया या फिर उसके बर्थडे पर उसे विश नहीं किया। यह सब करने के बाद क्या आपने सोचा है कि बच्चों की तस्वीरें सोशल मीडिया में शेयर होने जाने के बाद उसके साथ क्या- क्या हो सकता है, भले ही आप उन्हें अपने गूगल अकाउंट से डिलीट कर दें!
यह सच है कि सोशल मीडिया हमारी जिंदगी को काफी आसान बना चुकी है, लेकिन जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी विकसित हो रही है, हमारे लिए चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। इससे तस्वीरों का दुरुपयोग, पहचान की चोरी, साइबर बुलिंग और प्रीडेटर्स द्वारा बच्चों को निशाना बनाने का खतरा बना रहता है। एक बार पोस्ट की गई तस्वीर हमेशा के लिए इंटरनेट का हिस्सा बन जाती है, जो भविष्य में उनके डिजिटल फुटप्रिंट को प्रभावित कर सकती है।
नई-नई मां बनी राधिका का कहना है कि मैं 2 वर्षीय बच्चे की मां हूं। अकेले रहने की वजह से बच्चे और घर संभालना मेरे लिए बेहद मुश्किल होता था तो मैंने शुरुआत में बच्चे को फोन दिखाने लगी लेकिन धीरे-धीरे मेरे और बच्चे की आदत बन गई। मुझे भी थोड़ा आराम मिल जाता था। बाद में ये आदत मेरे लिए छुड़ाना बहुत मुश्किल हो गया।
राधिका ने कहा कि मैं प्रेगनेंसी से पहले जॉब करती थी। बाहर जाती थी। मुझे फोटो ाना और वीडियो बनाने का बेहद शौक था। बेटा वायु के होने के बाद मेरे ये सभी शौक ठंडे बस्ते में चले गए। एक दिन मुझे सोसाइटी की पार्क में नीलिमा मिलीं जिसने मुझे देखकर बोला कि तुमने, 'अपना क्या हाल बना लिया है' उनके इस सवाल के बाद मैंने कहा कि बच्चे के साथ पूरा दिन व्यस्त रहने की वजह से मैंने अपने ऊपर ध्यान देना छोड़ दिया है और सुंदर बनकर करना क्या है? कहीं जाना थोड़ी नहीं है। इसके बाद नीलिमा ने कहा कि तुम मां बनी हो, ये तो खुशी की बात है। इंस्टाग्राम के जमाने में तुम पुरानी बातें करती हो, 'तुम्हें तस्वीर और वीडियो का कितना शौक था।' उस शौक को जिंदा करो दोबारा अपनी तस्वीर शेयर करो। तुम बच्चे के साथ अपनी तस्वीर शेयर करो।
नीलिमा की ये बात सुनकर राधिका को लगा कि शायद नीलिमा ठीक ही कह रही है। घर जाकर राधिका फोटो अपलोड करने की प्लानिंग करने लगी। उसने पहली तस्वीर बेटे वायु के साथ अपलोड की। फोटो को कई लाइक मिले जिसके बाद राधिका रोज वायु की नई-नई एक्टिविटी की फोटो और वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट करने लगी। एक दिन उनके पति रितेश को ऑफिस में किसी कलिग ने बताया कि तुम्हारी पत्नी रोज-रोज बेटे की फोटो और लोकेशन क्यों पोस्ट करती रहती है, क्या उन्हें पता नहीं है कि आजकल बच्चों की तस्वीर का इस्तेमाल गलत तरीके से हो रहा है? रितेश के दोस्त अर्जुन ने बताया कि 'शेयरटिंग' की वजह से कई बच्चे साइबर क्राइम का शिकार हो रहे हैं।
1. 'शेयरटिंग' वह प्रक्रिया है, जिसमें मातापिता अपने बच्चों की तस्वीरें, वीडियो, स्कूल की जानकारी, लोकेशन या उनकी निजी बातें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि पर शेयर करते हैं।
2. जब माता-पिता अपने बच्चों की हर चीजें ऑनलाइन माध्यम से पोस्ट करते हैं तो उनकी निजी जानकारी किसी ऐसे शख्स के हाथों में भी जा सकती है, जो इनकी तस्वीरों का गलत फायदा भी उठाते हैं।
3. सोशल मीडिया पर बच्चों की उप लब्ध्यिां शेयर करना भी उनके लिए मानसिक खतरा हो सकता है। कई बार माता-पिता बिना कुछ सोचे समझे बच्चे के स्कूल के बारे में जानकारी डाल देते हैं जिसकी वजह से उन्हें आगे भविष्य में खतरा हो सकता है।
4. बच्चों को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने के लिए हर फोटो या जानकारी शेयर करने से पहले यह जरूर सोचें कि क्या यह वाकई जरूरी है?
स्मार्टफोन में व्यस्त रहने के कारण बच्चे की बात पर ध्यान न देना माता-पिता और बच्चों के बीच के भावनात्मक जुड़ाव को कम कर सकता है।प्राइवेसी सेटिंग्स का ध्यान रखें: अपने सोशल मीडिया अकाउंट को प्राइवेट रखें और केवल भरोसेमंद लोगों के साथ ही पोस्ट शेयर करें।
लोकेशन और निजी जानकारी से बचें: बच्चों का स्कूल, घर का पता या रूटीन जैसी जानकारी साझा न करें।
बच्चों की सहमति लें: जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, उनसे पूछकर ही उनकी तस्वीरें पोस्ट करें।
Sharenting Risks in Hindi: बच्चों को भी इंटरनेट की सुरक्षा और प्राइवेसी के बारे में सिखाएं
सोशल मीडिया पर बच्चों की तस्वीरें शेयर करने (Sharenting) के दौरान उनकी प्राइवेसी और सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।1. अगर आपको अपने बच्चे की तस्वीरें शेयर करनी है तो उसे अपने फैमिली ग्रुप में शेयर करें या बच्चे की तस्वीर छुपा दें। बच्चे की सुरक्षा आपके हाथ में है। अपने इमोशंस को कंट्रोल करें और बच्चे के साथ भावनात्मक बॉन्डिंग डेवलप करें।
2. बच्चों को आपका समय चाहिए। उन्हें अपनी तस्वीर इंस्टाग्राम पर देखकर कोई खुशी नहीं मिलती है। बच्चों के साथ खेलें उन्हें कहानी सुनाएं और उन्हें अपना समय दें।
3. डिजिटल युग में हम इससे दूर तो नहीं हो सकते हैं लेकिन इसका उपयोग समझदारी से करें और अपना और बच्चे का भविष्य सुरक्षित बनाएं।
4. सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बच्चों को डिजिटल दुनिया में स्मार्ट बनाना भी जरूरी है। उन्हें सिखाएं कि इंटरनेट का इस्तेमाल पढ़ाई, नई चीजें सीखने और अपनी क्रिएटिविटी बढ़ाने के लिए कैसे किया जा सकता है।
कुछ जरूरी बातें
रात के अंधेरे में या लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन देखने से बच्चों की आंखों की रोशनी और नींद के चक्र (Sleep Cycle) पर बुरा असर पड़ सकता है।प्राइवेसी अलर्ट: बच्चों की पर्सनल जानकारी अनजाने में पब्लिक हो सकती है।
लोकेशन का खतरा: एक फोटो से घर, स्कूल या जगह की पहचान हो सकती है।
डिजिटल फुटप्रिंट: एक बार पोस्ट हुई तस्वीर इंटरनेट पर हमेशा रह सकती है।
मिसयूज का रिस्क: तस्वीरों का गलत इस्तेमाल या एडिटिंग हो सकती है।
बच्चों की पहचान: उनकी ऑनलाइन पहचान बिना उनकी समझ के बन जाती है।
सोच-समझकर शेयर करें: हर क्यूट फोटो सोशल मीडिया पर डालना जरूरी नहीं।
अजनबियों से सावधान: कौन आपकी पोस्ट देख रहा है, यह हमेशा साफ नहीं होता।
भविष्य पर असर: आज की पोस्ट कल बच्चे के लिए परेशानी बन सकती है।
सेफ्टी सेटिंग्स अपनाएं: प्राइवेसी सेटिंग्स को हमेशा अपडेट और स्ट्रॉन्ग रखें।
बच्चों की सहमति जरूरी: उम्र के अनुसार उनकी पसंद-नापसंद का ध्यान रखें।
FAQ
Q. शेयरेंटिंग (Sharenting) क्या होता है और यह आज के समय में क्यों चर्चा में है? A. शेयरेंटिंग दो शब्दों (Sharing + Parenting) से मिलकर बना है। इसका मतलब है माता-पिता द्वारा अपने बच्चों की हर छोटी-बड़ी तस्वीर, वीडियो, स्कूल और लोकेशन की जानकारी सोशल मीडिया पर अत्यधिक पोस्ट करना, जो बच्चों की साइबर सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है। Q. सोशल मीडिया पर बच्चों की तस्वीरें पब्लिक करने के क्या-क्या मुख्य साइबर खतरे हैं? A. इसके सबसे मुख्य खतरे हैं—पहचान की चोरी (Identity Theft), साइबर प्रीडेटर्स द्वारा बच्चे के डेली रूटीन को ट्रैक करना, एआई (AI) टूल्स के जरिए चेहरे की मॉर्फिंग करके डीपफेक बनाना और बच्चे का एक अनचाहा स्थाई डिजिटल फुटप्रिंट तैयार होना। Q. क्या बच्चों की स्कूल यूनिफॉर्म या स्कूल वैन के साथ फोटो पोस्ट करना सुरक्षित है? A. बिल्कुल नहीं। स्कूल यूनिफॉर्म, आईडी कार्ड या स्कूल वैन की तस्वीरों से साइबर अपराधियों को बच्चे के स्कूल का नाम, पता और उसकी टाइमिंग्स आसानी से मिल जाती हैं, जिससे बच्चे के साथ ऑनलाइन या ऑफलाइन धोखाधड़ी या किडनैपिंग का रिस्क बढ़ जाता है। Q. हम अपने सोशल मीडिया अकाउंट को बच्चों की सुरक्षा के लिए कैसे कस्टमाइज करें? A. इसके लिए सबसे पहले अपने इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट को 'पब्लिक' से हटाकर 'प्राइवेट' करें। अपनी फ्रेंड लिस्ट की समीक्षा करें और केवल उन्हीं करीबियों को रखें जिन्हें आप व्यक्तिगत रूप से जानते हैं। साथ ही, 'लोकेशन टैगिंग' पूरी तरह बंद रखें। Q. डिजिटल फुटप्रिंट (Digital Footprint) क्या होता है और यह बच्चे के भविष्य को कैसे प्रभावित करता है? A. इंटरनेट पर किसी भी व्यक्ति के बारे में मौजूद कुल डेटा या तस्वीरों के रिकॉर्ड को डिजिटल फुटप्रिंट कहते हैं। बचपन में माता-पिता द्वारा डाली गई कोई भी आपत्तिजनक या अजीब तस्वीर इंटरनेट पर हमेशा के लिए रह सकती है, जो बड़े होने पर बच्चे को हीन भावना या साइबर बुलिंग का शिकार बना सकती है।

