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RBI की मौद्रिक नीति: रेपो रेट में कटौती की संभावना

RBI की मौद्रिक नीति: रेपो रेट में कटौती की संभावना

Gyan Hi Gyan Hindi 7 months ago

आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक

रबीआई रेपो रेट : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में अपनी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट (Repo Rate) में कटौती करने से इनकार किया है। जीएसटी में हालिया कमी के बाद, लोगों को ब्याज दरों में राहत की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

अक्टूबर की इस बैठक में RBI ने रेपो रेट को 5.5% पर बनाए रखा है, और यह लगातार दूसरी बार है जब इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया। अमेरिकी फर्म मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि RBI की अगली MPC बैठक, जो दिसंबर में होगी, में रेपो रेट में कटौती की संभावना है, जिससे यह 5% तक गिर सकता है।

मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिसंबर की नीति में 25 आधार अंकों की कटौती की संभावना है। यह घरेलू विकास और महंगाई के रुझानों के अनुसार एक उचित कदम होगा। RBI ने वित्त वर्ष 26 के लिए GDP अनुमान को 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया है। हालांकि, व्यापार और टैरिफ से जुड़ी समस्याओं के कारण वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में आर्थिक विकास में कमी का खतरा है।

महंगाई के अनुमान में कमी

RBI ने वित्त वर्ष 26 के लिए मुख्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति के अनुमान को 3.1% से घटाकर 2.6% कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अगले साल मुद्रास्फीति लगभग 4.5% रहने की उम्मीद है। हालांकि, मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि वित्त वर्ष 26 और 27 में मुद्रास्फीति औसतन 4% से कम रहेगी, जबकि आर्थिक विकास थोड़ा कमजोर हो सकता है।

इन सभी परिस्थितियों के चलते ब्याज दरों में कटौती की संभावना बढ़ रही है। मॉर्गन स्टेनली ने सुझाव दिया है कि RBI को इस मौद्रिक नीति बैठक में ही रेपो रेट में कटौती करनी चाहिए थी, क्योंकि मौद्रिक नीति का प्रभाव दिखने में समय लगता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अब ब्याज दरों में कटौती का सही समय है, क्योंकि नीतिगत प्रभाव में देरी हो रही है।

कटौती के प्रमुख कारण

RBI की मौद्रिक नीति को मजबूत करने वाले कारक ब्याज दरों में राहत की संभावना को बढ़ा रहे हैं। सबसे पहले, मुख्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में कीमतों में गिरावट का स्पष्ट ट्रेंड है। दूसरा, आर्थिक वृद्धि की स्थिति कमजोर है, जो रेपो रेट में कटौती की मांग को और मजबूत कर रही है।

तीसरा, वैश्विक आर्थिक माहौल अनुकूल है, जो RBI को साहस दे रहा है। कुल मिलाकर, दिसंबर की अगली बैठक में कुछ सकारात्मक समाचार मिलने की उम्मीद है।


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