तिरुवनंतपुरम: केरल राज्य मानवाधिकार आयोग (Kerala State Human Rights Commission) ने राज्य पुलिस को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद एक संदर्भ को संशोधित करने का निर्देश दिया है। इस संदर्भ में यह सुझाव दिया गया था कि पुलिस कुछ हद तक नागरिक विवादों (civil disputes) में हस्तक्षेप कर सकती है जिस पर प्रतिक्रिया करते हुए आयोग ने कहा कि ऐसा दावा कानूनी रूप से मान्य नहीं है।
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अलेक्जेंडर थॉमस ने निर्देश दिया कि दो महीने के भीतर आवश्यक सुधार किए जाएं। आयोग ने इस बात पर ज़ोर दिया कि उच्च न्यायालयों (High Courts) और सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने स्पष्ट रूप से यह फैसला दिया है कि पुलिस को नागरिक विवादों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। ऐसे में, वेबसाइट पर मौजूद मौजूदा शब्दावली स्थापित कानूनी मानदंडों के अनुरूप नहीं है।
यह आदेश पुलिस वेबसाइट पर प्रकाशित 'नागरिक चार्टर' के पांचवें खंड में संशोधन की मांग करने वाली एक शिकायत के जवाब में जारी किया गया। अपने जवाब में, राज्य पुलिस प्रमुख ने आयोग को सूचित किया कि नागरिक चार्टर को संशोधित करने की प्रक्रिया पहले से ही चल रही है और इस मामले को संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया है। आयोग ने सामाजिक कार्यकर्ता आर. जयचंद्रन द्वारा दायर एक याचिका पर यह कार्रवाई की।

