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देश के लाखों शिक्षकों को खुशखबरी, सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत

देश के लाखों शिक्षकों को खुशखबरी, सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत

Happy News 1 week ago
ई दिल्ली। देश के लाखों कार्यरत शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर चल रही सुनवाई में कार्यरत शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए समय सीमा एक साल बढ़ा दी है।
अब शिक्षकों को TET पास करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया गया है। पहले यह समय सीमा 31 अगस्त 2027 तय की गई थी।

हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि TET अनिवार्यता पूरी तरह समाप्त नहीं की गई है, बल्कि इसे लागू करने की समय सीमा को बढ़ाया गया है। इस फैसले के बाद भी शिक्षकों की नौकरी और प्रमोशन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस दीपांकर दत्ता कर रहे थे, ने पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह निर्णय दिया। अदालत ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET के दायरे से बाहर रखने की मांग की गई थी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में कार्यरत सभी गैर-अल्पसंख्यक स्कूलों के कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य रहेगा।

शिक्षकों को मिला अतिरिक्त समय

कोर्ट ने पहले दिए गए निर्देश में संशोधन करते हुए शिक्षकों को परीक्षा पास करने के लिए अतिरिक्त समय प्रदान किया है। अब शिक्षकों के पास लगभग तीन साल की अवधि है, जिसमें उन्हें TET पास करना होगा। यदि निर्धारित समय सीमा में परीक्षा पास नहीं की जाती है, तो सेवा से इस्तीफा या अनिवार्य सेवानिवृत्ति की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

नौकरी और प्रमोशन पर असर

इस निर्णय का असर देश के लाखों प्राथमिक शिक्षकों पर पड़ेगा, खासकर उन शिक्षकों पर जो वर्षों से बिना TET पास किए कार्यरत हैं। फैसले के अनुसार, केवल उन्हीं शिक्षकों को कुछ राहत मिल सकती है जिनकी सेवानिवृत्ति में पाँच वर्ष से कम समय बचा है। हालांकि प्रमोशन के लिए भी TET पास करना आवश्यक होगा।

राज्यों में पहले से चल रहा विवाद

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और तमिलनाडु सहित कई राज्यों के शिक्षक संघ इस फैसले का विरोध कर चुके हैं। इनका कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए अचानक यह अनिवार्यता व्यावहारिक चुनौतियां पैदा कर सकती है। इसी कारण कई राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिकाएं भी दाखिल की थीं, जिन पर अब फैसला आ चुका है।

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