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यूपी में यहां बिछेगी चौथी रेल लाइन, इन जिलों के लिए खुशखबरी

यूपी में यहां बिछेगी चौथी रेल लाइन, इन जिलों के लिए खुशखबरी

Happy News 4 months ago
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। पूर्वोत्तर रेलवे के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल बाराबंकी-गोरखपुर रेलखंड पर अब चौथी रेलवे लाइन बिछाने की तैयारी तेज हो गई है।
रेलवे ने इसके लिए आवश्यक सर्वेक्षण का कार्य पूरा कर लिया है और जल्द ही परियोजना पर काम शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम होगी और यात्रियों को बेहतर रेल सेवाएं मिल सकेंगी। फिलहाल चौथी लाइन बिछाने के लिए प्रारंभिक सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है। अब आगे की प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

पहली बार चार लाइनों वाला बनेगा रेल मार्ग

वर्तमान में इस महत्वपूर्ण रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी को देखते हुए रेलवे पहले से चल रहे तीसरी लाइन के निर्माण कार्य के साथ अब चौथी लाइन बिछाने की योजना पर भी आगे बढ़ रहा है। बुढ़वल से गोंडा कचेहरी तक तीसरी लाइन का निर्माण कार्य जारी है। इसके बाद इसी मार्ग पर चौथी लाइन भी विकसित की जाएगी। यह पहली बार होगा जब इस रेलखंड पर चार रेलवे लाइनें उपलब्ध होंगी।

किन जिलों को मिलेगा फायदा?

इस परियोजना का सीधा लाभ बाराबंकी, गोंडा, बहराइच क्षेत्र से जुड़े यात्रियों और गोरखपुर मंडल के लोगों को मिलेगा। इसके अलावा पूर्वांचल और तराई क्षेत्र के लाखों रेल यात्रियों को भी बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलने की संभावना है। रेल मार्ग की क्षमता बढ़ने से लंबी दूरी की ट्रेनों के साथ-साथ मालगाड़ियों का संचालन भी अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।

रोजाना 100 से अधिक ट्रेनों का संचालन

बाराबंकी-गोरखपुर रेलखंड पूर्वोत्तर रेलवे के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त मार्गों में गिना जाता है। वर्तमान समय में इस रूट पर प्रतिदिन 100 से अधिक ट्रेनों का संचालन होता है। यात्रियों की बढ़ती संख्या और माल परिवहन की जरूरतों को देखते हुए रेलवे को अतिरिक्त लाइन की आवश्यकता महसूस हो रही थी। चौथी लाइन बनने के बाद ट्रैफिक दबाव काफी हद तक कम हो सकता है।

ट्रेनों की समयबद्धता में होगा सुधार

रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार नई लाइन तैयार होने के बाद ट्रेनों के क्रॉसिंग और ओवरटेकिंग में लगने वाला समय कम होगा। इससे ट्रेनों की लेटलतीफी में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के संचालन को अलग-अलग तरीके से प्रबंधित करना आसान होगा, जिससे पूरे नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी।

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