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ब्लड टेस्ट से चार साल पहले ही चल जाएगा अल्जाइमर का पता, शोध में दावा

नई दिल्ली। दुनियाभर में करोड़ों लोग हैं, जो अल्जाइमर नामक बीमारी से जूझ रहे हैं लेकिन अब आने वाले समय में इस समस्या से समाधान मिल सकता है। दरअसल, शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि एक ब्लड टेस्ट की मदद से अल्जाइमर का चार या पांच साल पहले ही पता लगाया जा सकता है और उसे रोकने के लिए इलाज किया जा सकता है।

अल्जाइमर का पता लगाने के लिए खून में मौजूद दो मोलीक्यूल की मात्रा जांची जाती है। एक ब्लड टेस्ट में दो मोलीक्यूल पाए जाते हैं, जिनका नाम 'पी टाऊ 181' है, जो एक टाऊ प्रोटीन है जबकि दूसरा 'न्यूरोफिलामेंट प्रकाश पॉलीपेप्टाइड' (एनएफएल) है जो प्लाज्मा में पाया जाता है। यह हल्के पीले रंग का होता है।

सैकड़ों लोगों का लिया सैंपलः
शोधकर्ताओं ने इस शोध के लिए सैकड़ों लोगों के सैंपल इकट्ठे किए, जिनकी उम्र 60 से 70 के बीच थी। इनके अंदर पी-टाऊ181 और एनएफएल में से एक का स्तर उच्च पाया गया और उनके अल्जाइमर के बारे में जो पूर्वानुमान लगाया गया, वह आगे चलकर सही साबित हुआ। उन लोगों को आगे चलकर गंभीर स्मृति संबंधी समस्या का सामना करना पड़ा।

शोधकर्ताओं ने कहा कि खास ब्लड टेस्ट इन दो मॉलीक्यूल को पहचानने की क्षमता रखता है, जो अल्जाइमर बढ़ने की संभावना का संकेत देते हैं। स्वीडन के लुंड विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का कहना है कि उनका अध्ययन अल्जाइमर का पूर्वानुमान लगाने की क्षमता रखता है।

यह ब्लड टेस्ट गेम चेंजर साबित हो सकता हैः
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर मसूद हुसैन, जो अध्ययन में शामिल नहीं थे, उन्होंने इसे 'गेमचेंजर' बताया है। उन्होंने कहा कि पहली बार हमें ब्लड टेस्ट की ऐसी पद्धति मिली है, जो संज्ञानात्मक लक्षणों वाले लोगों में अल्जाइमर रोग के बाद के विकास के जोखिम का अच्छी तरह से अनुमान लगाने की कूवत रखता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी पद्धति को और अधिक सत्यापन की जरूरत है।

अल्जाइमर के कारणों की खोजः
दुनियाभर में करीब पांच करोड़ लोग अल्जाइमर से संक्रमित हैं। अल्जाइमर रोग होने का सटीक कारण अभी भी वैज्ञानिकों के लिए एक गुत्थी बना हुआ है। यह मस्तिष्क कोशिकाओं के आसपास और आसपास प्रोटीन के असामान्य निर्माण के कारण माना जाता है।

क्या है अल्जाइमरः
अल्जाइमर रोग मुख्य रूप से डिमेंशिया का रूप है। डिमेंशिया बीमारी से अर्थ ऐसी स्थिति से है जब किसी व्यक्ति के दिमाग की कोशिकाएं कमजोर या नष्ट हो जाती हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति भूलने लगता है, जिसके चलते वे 1-2 मिनट पहले हुई बात को भी भूल जाते हैं। जब डिमेंशिया बढ़ जाती है, तो उसे अल्जाइमर रोग कहा जाता है।

Dailyhunt
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