
हरियाणा के यमुनानगर में महज 11 साल की बच्ची ने नवजात को जन्म दिया है। जिला नागरिक अस्पताल में प्रसव के बाद फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है। घटना सामने आने के बाद से ही क्षेत्र में आक्रोश और प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है।
बच्ची 5वीं कक्षा की छात्रा है। यह हैरान करने वाला मामला तब उजागर हुआ था जब बच्ची स्कूल में पढ़ाई कर रही थी और अचानक उसके पेट में तेज दर्द उठा। अस्पताल ले जाने पर जो सच्चाई सामने आई, उसने परिजनों के साथ-साथ पुलिस के भी होश उड़ा दिए।
स्कूल में अचानक बिगड़ी थी तबीयत
पीड़िता की मां छछरौली इलाके की एक दवा निर्माता कंपनी में मजदूरी करती है। उनके चार बच्चों में सबसे बड़ी बेटी गांव के ही सरकारी स्कूल में पांचवीं कक्षा में पढ़ती है। बीते 22 मई को स्कूल के दौरान जब बच्ची की सेहत बिगड़ी, तो उसे तुरंत छछरौली के नजदीकी नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में जब डॉक्टरों ने शुरुआती जांच की तो पता चला कि मासूम बच्ची लगभग सात महीने की गर्भवती है।
फैक्ट्री मालिक के ड्राइवर ने डर दिखाकर किया शोषण
गहन पूछताछ के दौरान बच्ची ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि नवंबर 2025 में सलेमपुर खादर के रहने वाले राकेश कुमार ने उसके साथ क्वार्टर में हैवानियत की थी। आरोपी राकेश उसी फैक्ट्री के मालिक का चालक था, जहां पीड़िता की मां काम करती थी।
आरोपी दरिंदा बच्ची को मुंह बंद रखने के लिए लगातार जान से मारने और उसकी मां को नौकरी से निकलवाने की धमकियां देता था। इसी डर की वजह से बच्ची महीनों तक इस खौफनाक दर्द को सीने में दबाए रही और आरोपी उसका शोषण करता रहा।
7 महीने का गर्भ होने से अबॉर्शन था असंभव
शिकायत मिलते ही छछरौली थाना पुलिस एक्शन में आई। एएसआई मंजीत कौर ने बताया कि मई में सूचना मिलते ही मामले की गहन जांच शुरू की गई थी। आरोपी ड्राइवर को गिरफ्तार कर अदालत के आदेश पर जेल भेजा जा चुका है।
चिकित्सकों के अनुसार जब मामला सामने आया तब तक गर्भ 7 माह का हो चुका था। बेहद कम उम्र और मेडिकल जोखिमों के कारण कानूनी व चिकित्सीय आधार पर अबॉर्शन कर पाना संभव नहीं था। लिहाजा डॉक्टरों की देखरेख में गर्भावस्था को जारी रखा गया।
CWC को सौंपी जाएगी नवजात
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि मंगलवार को प्रसव पीड़ा उठने पर पीड़िता को अस्पताल लाया गया, जहां बुधवार सुबह उसने नॉर्मल डिलीवरी के जरिए बच्ची को जन्म दिया। कम उम्र के कारण प्रसव के बाद नाबालिग को अत्यधिक शारीरिक कमजोरी है, इसलिए उसे दो-तीन दिन डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाएगा।
इधर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) की टीम ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया है। पीड़िता के परिजनों ने सहमति व्यक्त की है कि वे नवजात बच्ची की बेहतर देखभाल के लिए उसे बाल कल्याण समिति को सौंप देंगे।
आनंद नायक

