यशवंत गंजीर- धमतरी। धमतरी जिले के नगरी थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में सड़क सुरक्षा के प्रति लापरवाही और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली को उजागर कर दिया है।
गजकन्हार और कल्लेमेटा के बीच हुए इस हादसे में एक युवक की जान चली गई, जबकि उसका साथी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई बाइक
अमाली निवासी पेमन ध्रुव, रौशन यादव और हिथलेश माडमसिल्ली बांध घूमकर वापस लौट रहे थे, तभी बाइक चला रहे पेमन की आंख में एक उड़ता हुआ कीड़ा लग गया। पलक झपकते ही बाइक अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि पेमन ध्रुव की जान नहीं बचाई जा सकी, वहीं रौशन यादव की हालत गंभीर बनी हुई है।
सुरक्षा कवच की अनदेखी
यह हादसा इस बात का जीता-जागता सबूत है कि दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट और सुरक्षा चश्मे का उपयोग कितना अनिवार्य है। अक्सर लोग हेलमेट को केवल पुलिस चालान से बचने का साधन समझते हैं। यदि युवक ने फुल-फेस हेलमेट पहना होता और उसका शीशा गिरा होता, तो आंख में कीड़ा लगने जैसी नौबत ही नहीं आती और यह हादसा टाला जा सकता था।
रफ्तार का कहर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाइक की रफ्तार तेज थी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वाहन की गति नियंत्रित हो, तो ऐसी आपातकालीन स्थिति में भी चालक को गाड़ी संभालने या सुरक्षित रोकने का समय मिल जाता है।
नहीं मिला 'गोल्डन आवर' में इलाज
इस हादसे ने नगरी क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। दुर्घटना के बाद का पहला घंटा (गोल्डन आवर) किसी भी घायल की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। नगरी सिविल अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद दोनों घायलों को जिला अस्पताल धमतरी रेफर किया गया। इस लंबी दूरी को तय करने में जो कीमती समय बर्बाद हुआ, उसी के बीच पेमन ध्रुव ने दम तोड़ दिया।
बेहतर ट्रॉमा सेंटर की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और समाजसेवियों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि नगरी क्षेत्र में एक सर्वसुविधायुक्त ट्रॉमा सेंटर और आपातकालीन आईसीयू की व्यवस्था की जाए, ताकि गंभीर मरीजों को रेफर करने के बजाय वहीं उनका इलाज शुरू किया जा सके।
पुलिस की अपील- सुरक्षा न समझें बोझ
नगरी पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस प्रशासन ने क्षेत्र के युवाओं से अपील की है कि वे सुरक्षा उपकरणों को बोझ न समझें। घर से निकलते समय हेलमेट जरूर पहनें, उसकी पट्टी बांधें और वाइजर का उपयोग करें, क्योंकि सड़क पर एक सेकंड की लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।
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चंद्रकांत शुक्ला

