गौरव तिवारी- सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पोलमपल्ली गांव की रहने वाली दृष्टिहीन छात्रा सोढ़ी बीड़े ने यह साबित कर दिया कि सफलता पाने के लिए आंखों की रोशनी नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है।
बचपन में आंखों की रोशनी खो देने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत के बल पर 12वीं बोर्ड परीक्षा में 71 प्रतिशत अंक हासिल कर एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है।
बचपन की कठिनाइयों के बीच नहीं छोड़ा पढ़ाई का सपना
सोढ़ी बीड़े ने बताया कि बचपन में एक बीमारी के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई। इसके बाद उनका अधिकांश समय मां के साथ बीतता था। जब गांव के बच्चे स्कूल जाते थे, तब वे या तो घर पर रहती थीं या मां के साथ काम पर जाती थीं। बाद में ग्रामीणों की प्रेरणा पर परिवार ने उन्हें स्कूल भेजा और यहीं से उनकी शिक्षा की नई शुरुआत हुई।
विशेष संस्था से मिली नई उड़ान
गांव के स्कूल में शुरुआती पढ़ाई के बाद उन्होंने सुकमा में दिव्यांग बच्चों के लिए संचालित एक विशेष संस्था में प्रवेश लिया। यहां उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर मिला। इसी दौरान उन्होंने खैरागढ़ विश्वविद्यालय से संगीत की शिक्षा भी प्राप्त की और अपनी गायन प्रतिभा से जिले में अलग पहचान बनाई।
अब नासिक में डीएड की तैयारी
12वीं में शानदार सफलता के बाद सोढ़ी बीड़े अब महाराष्ट्र के नासिक जाकर डीएड (विशेष शिक्षा) की पढ़ाई करने की तैयारी कर रही हैं। इसी वर्ष उनकी संगीत शिक्षा भी पूरी होने वाली है। उनका सपना है कि वे पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनें और समाज के लिए प्रेरणा बनें।
भक्ति और संगीत से मिलता है आत्मविश्वास
सोढ़ी बीड़े का कहना है कि वे खुद को किसी भी सामान्य व्यक्ति से कम नहीं मानतीं। उन्हें भगवान भोलेनाथ पर अटूट विश्वास है और वे अधिकतर शिव भजन गाना पसंद करती हैं। उनका मानना है कि ईश्वर की कृपा, परिवार का सहयोग और अपनी मेहनत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है।
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गरिमा थवाईत

