
लखनऊ: आग से सुरक्षा के इंतजामों को लेकर डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ने प्रदेश में मिसाल कायम की है। संस्थान प्रशासन की लगातार मेहनत और अग्निशमन विभाग के साथ समन्वय के चलते 16 में से 15 भवनों को फायर एनओसी प्राप्त हो चुकी है।
निदेशक डॉ. सीएम सिंह के अनुसार संस्थान में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज, तीमारदार, मेडिकल छात्र, रेजिडेंट डॉक्टर और कर्मचारी मौजूद रहते हैं।
ऐसे में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी मानकों को पूरा करने का काम किया गया। इसी वजह से लोहिया राजधानी का पहला मेडिकल संस्थान बन गया है जिसके ज्यादातर भवनों को फायर विभाग की अनापत्ति मिल चुकी है।
KGMU और PGI की स्थिति अभी संतोषजनक नहीं
शहर के अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों की हालत अभी ठीक नहीं है। केजीएमयू और पीजीआई के अधिकांश भवन अब तक अग्निशमन विभाग के सभी मानकों को पूरा नहीं कर सके हैं। इसी कारण उन्हें फायर एनओसी नहीं मिल पाई है। सूत्रों के मुताबिक केजीएमयू को मानकों में कमी मिलने पर अग्निशमन विभाग की ओर से कई बार नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े संस्थानों में फायर सेफ्टी में देरी मरीजों और स्टाफ दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकती है।
कमियों को दूर कर मिली सफलता, एक भवन की एनओसी बाकी
डॉ. सीएम सिंह ने बताया कि अग्निशमन विभाग ने निरीक्षण के दौरान जो कमियां बताईं थीं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया गया। फायर फाइटिंग सिस्टम, एग्जिट रूट और अलार्म जैसी व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया गया।उन्होंने बताया कि एक भवन की एनओसी अभी बाकी है।
उसके लिए भी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। विभागीय अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल की वजह से बाकी भवनों को समय पर एनओसी मिल सकी। संस्थान का लक्ष्य है कि जल्द ही पूरे परिसर को फायर सेफ्टी के मानकों के अनुरूप कर लिया जाए।
अभिषेक यादव

