
हरियाणा के हांसी स्थित चैनत गांव में सोमवार को पेयजल संकट को लेकर ग्रामीण उग्र हो गए। अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने अचानक भाखड़ा पेयजल पाइपलाइन को उखाड़ने की पुरजोर कोशिश की।
दोपहर करीब डेढ़ बजे लाठी-डंडों, हथौड़ों और लोहे की छड़ों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण धरना स्थल से उठकर मुख्य लाइन के पास पहुंच गए। जब लोहे के औजारों से मजबूत पाइपलाइन नहीं टूटी, तो गुस्साए ग्रामीणों ने विशालकाय पाइपों को खींचकर हांसी-बरवाला मुख्य मार्ग पर डाल दिया और चक्का जाम कर दिया।
भारी फोर्स तैनात
सड़क जाम और पाइपलाइन को क्षति पहुंचाने की जानकारी मिलते ही पूरे प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए उपमंडल मजिस्ट्रेट (SDM) राजेश कोथ, पुलिस उपाधीक्षक (DSP) रविंद्र सांगवान और सदर थाना अध्यक्ष सदानंद भारी पुलिस बल के साथ तुरंत ग्राउंड जीरो पर पहुंचे।
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई, जिससे एक समय मौके पर तनाव काफी बढ़ गया था। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया।
करीब ढाई घंटे ठप रहा यातायात
इस विरोध प्रदर्शन की वजह से नेशनल हाईवे 148B को जोड़ने वाले हांसी-बरवाला मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को पैदल ही गंतव्य की ओर निकलना पड़ा। आखिरकार करीब ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत और प्रशासनिक कमेटी के साथ हुई लंबी वार्ता के बाद ग्रामीणों ने जाम खोला।
रोघी खाप के प्रधान सुमेर डाटा और आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि वे पीछे नहीं हटेंगे। फिलहाल धरने को मंगलवार तक के लिए टाल दिया गया है, जहां ग्रामीण दोबारा एकत्रित होकर कोई बड़ा फैसला लेंगे।
पिछले 17 दिनों से चल रहा आंदोलन
गौरतलब है कि चैनत गांव के बाशिंदे पिछले 17 दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं। उनकी मुख्य मांग है कि इस गुजरने वाली पाइपलाइन से उनके गांव को भी पानी का कनेक्शन आवंटित किया जाए। ग्रामीणों ने पहले ही अल्टीमेटम दे दिया था कि यदि उनकी सुनवाई नहीं हुई, तो वे सरकारी संपत्ति को उखाड़ फेंकेंगे, जिसके बाद सोमवार को यह हिंसक रूप देखने को मिला।
किसान नेताओं ने सरकार को घेरा
किसान नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लिया है। किसान नेता सुरेश कोथ ने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा कि आज सरकार की किस्मत अच्छी थी कि मौके पर हमारे पास जेसीबी मशीन मौजूद नहीं थी, वरना पाइपलाइन आज ही जमींदोज हो जाती। हम चाहते हैं कि शासन बातचीत के जरिए रास्ता निकाले, नहीं तो आने वाले समय में इससे 10 गुना बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
दूसरी तरफ, भारतीय किसान यूनियन के नेता दशरथ मलिक ने इसे केवल वोटों की राजनीति करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन जानबूझकर लोगों को आपस में लड़ाना चाहता है, क्योंकि अगर चैनत गांव को कनेक्शन नहीं मिला तो ग्रामीण अड़े रहेंगे और अगर लाइन रोकी गई तो हांसी शहर के लोग सड़कों पर उतर आएंगे।
80 करोड़ रुपये का है प्रोजेक्ट
इस पूरे विवाद की जड़ में राजली-हांसी पेयजल पाइपलाइन परियोजना है। केंद्र सरकार की 'अमृत योजना' के तहत लगभग 80 करोड़ रुपये की लागत से करीब 30 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बरवाला के राजली भाखड़ा हेड से हांसी शहर तक ले जाई जा रही है, ताकि शहरी क्षेत्र की पानी की किल्लत को समाप्त किया जा सके। यह निर्माणाधीन पाइपलाइन राजली से होते हुए चैनत गांव तक पहुंच चुकी है।
ग्रामीणों का तर्क है कि जब यह परियोजना उनके क्षेत्र की भूमि से होकर गुजर रही है, तो उन्हें इस पानी से वंचित क्यों रखा जा रहा है। दूसरी ओर, अधिकारियों का कहना है कि यह विशेष प्रोजेक्ट केवल हांसी शहर के लिए डिजाइन किया गया है, जिसके चलते नियमानुसार बीच में किसी गांव को पानी देना संभव नहीं है। फिलहाल प्रशासन ने जेसीबी की मदद से सड़क से अवरोध हटाकर यातायात बहाल कर दिया है।
आनंद नायक

