
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद स्थित ऐतिहासिक कसमंडी कलां किला विवाद में अब एक नया और बेहद तीखा राजनीतिक मोड़ आ गया है। इस धरोहर पर मालिकाना हक को लेकर चल रहे टकराव के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के यूपी सेंट्रल जोन अध्यक्ष शेख ताहिर सिद्दीकी का एक विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो में एआईएमआईएम नेता अयोध्या के राम मंदिर और धार की भोजशाला का जिक्र करते हुए यह कहते नजर आ रहे हैं कि 'इनके हिंदू देवी-देवताओं को हमारे मकबरे और मस्जिद ही क्यों पसंद आते हैं?' इस बयान के सामने आने के बाद क्षेत्र में धार्मिक और राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं।
"तलवार के डर से सलवार पहनने वाले हमें न सिखाएं" - सूरज पासी का पलटवार
शेख ताहिर सिद्दीकी के इस बयान पर आंदोलन की अगुवाई कर रहे लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी ने बेहद आक्रामक और तीखी प्रतिक्रिया दी है। ओवैसी की पार्टी के नेता को आड़े हाथों लेते हुए सूरज पासी ने गरजकर कहा, "जिनके बाप-दादाओं ने विदेशी आक्रांताओं की तलवार के डर से अपनी संस्कृति छोड़कर सलवार पहनना शुरू कर दिया था, वो आज हमारे गौरवशाली इतिहास और आस्था पर सवाल उठा रहे हैं।"
सूरज पासी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि कसमंडी का यह किला उनके पूर्वज महाराजा कंस पासी की ऐतिहासिक विरासत है, जिसके भीतर प्राचीन शिव मंदिर मौजूद है और पासी समाज अपनी इस धरोहर को वापस लेने के लिए किसी भी हद तक संघर्ष जारी रखेगा।
लाखन आर्मी ने मलिहाबाद थाने में दी तहरीर, मदरसे में धर्मांतरण का लगाया आरोप
इस जुबानी जंग के बीच लाखन आर्मी ने मलिहाबाद थाने में एक लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने किले के एक हिस्से पर कब्जा जमाए बहराइच निवासी मौलाना जमील अहमद और उनके सहयोगियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज करने की गुहार लगाई है।
पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया है कि किले के समीप बिना किसी सरकारी मान्यता के 'सुलेमानिया स्कूल' नाम से एक अवैध मदरसा संचालित किया जा रहा है। लाखन आर्मी का सीधा दावा है कि इस कथित संस्थान में आने वाले गरीब बच्चों का मानसिक रूप से "ब्रेनवॉश" किया जाता है और शिक्षा की आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध धर्मांतरण का खेल चल रहा है।
कसमंडी किले का इतिहास और सुरक्षा को लेकर मुस्तैद प्रशासन
गौरतलब है कि मलिहाबाद का कसमंडी किला विवाद पिछले कुछ समय से अवध क्षेत्र में भारी सांप्रदायिक तनाव की वजह बना हुआ है। पासी समाज जहां इसे 11वीं सदी के राजा कंस पासी का महल बताते हुए वहां नमाज पढ़ने और इसे कब्रिस्तान के रूप में विकसित करने की कोशिशों का कड़ा विरोध कर रहा है, वहीं मुस्लिम पक्ष का दावा है कि वहां लंबे समय से उनकी धार्मिक इबादत होती आ रही है।
ताजा विवादित वीडियो और पुलिस में दर्ज शिकायत की संवेदनशीलता को देखते हुए लखनऊ ग्रामीण पुलिस और खुफिया एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए किले के भीतर या आसपास किसी भी तरह की नई धार्मिक गतिविधि या आयोजन पर लगी रोक सख्ती से जारी रहेगी।
अभिषेक यादव

