Saturday, 27 Feb, 10.32 pm हरिभूमि

हेल्थ
कोविड-19 संक्रमण से बचाएगी कोरोना वैक्सीन

इसमें संदेह नहीं कि बीती लगभग एक सदी में कोरोना महामारी, सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती के रूप में सामने आई है। ऐसे में जहां लोगों ने संक्रमण से बचाव के तरीकों के अनुसार अपनी जीवनशैली को ढाल लिया है, वहीं संक्रमण के शुरुआती महीनों से ही देश-दुनिया में वैक्सीन बनाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी था। कुछ देशों ने वैक्सीन बनाकर अपने देश के लोगों को टीका लगाना शुरू कर दिया है। हाल में ही हमारे देश में भी दो वैक्सीन के निर्माण में सफलता पाई, और अब आगामी शनिवार से देशव्यापी वैक्सीनेशन शुरू हो रहा है।

मोड ऑफ एक्शन: सबसे पहले यह समझें कि कोई भी वैक्सीन काम कैसे करती है, वह हमारे शरीर को संबंधित रोग से बचाती किस प्रकार है? इस बारे में श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट, दिल्ली की सीनियर कंसल्टेंट-माइक्रोबायोलॉजी डॉक्टर ज्योति मुट्टा बताती हैं, 'वैक्सीन दरअसल किसी विशेष बीमारी से बचाव के लिए विकसित किया गया एक प्रकार की प्रतिरोधक दवा है। वैक्सीन को बनाने के लिए अकसर उस बीमारी के ऑर्गेनिज्म को प्रयोग में लाया जाता है, जिसमें उसके मृत या कमजोर हो चुके वर्जन का इस्तेमाल होता है। हालांकि कई बार किसी बीमारी के वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया में एंटीजन विकसित करने के लिए जेनेटिक इंजीनियरिंग का भी इस्तेमाल हो सकता है। वैक्सीन हमारे इम्यून सिस्टम में संबंधित बीमारी के एंटीबॉडीज का निर्माण करती है। ऐसे में वैक्सीन लगाने के बाद यदि हमारा शरीर उस बीमारी के संपर्क में आता है तो यह, उसे शरीर में बीमारी के रूप में विकसित होने से पहले ही इम्यून सिस्टम को बीमारी को नष्ट करने के योग्य बना देता है।'

कोविड-19 वैक्सीन की क्वालिटीज: अब अगर कोविड-19 के वैक्सीन की बात करें तो इस बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कर रहीं हैं, कंसल्टेंट एंड एचओडी-माइक्रोबायोलॉजी एंड इंफेक्शन कंट्रोल, धर्मशिला नारायणा सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल, दिल्ली की डॉक्टर गीताली भागवती। वह बताती हैं, 'सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने हाल ही में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की वैक्सीन कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को रिस्ट्रिक्टेड इमरजेंसी अप्रूवल को मंज़ूरी दी है।

कोविशील्ड: कोविशील्ड वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड द्वारा ऐस्ट्राजेनेका के सहयोग से विकसित किया गया है। भारत का सीरम इंस्टिट्यूट इनका मैन्युफैक्चरिंग और ट्रायल पार्टनर है। कोविशील्ड रीकॉम्बिनेंट चिंपैंजी एडीनोवायरस वेक्टर वैक्सीन है, जो टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से सार्स-कोव-2 स्पाइक ग्लाइकोप्रोटीन को एनकोड करती है। रीकॉम्बिनेंट वायरस वेक्टर दरअसल, टी-साईटोटॉक्सिक सेल्स के निर्माण में मदद करता है, जिससे सेल मीडिएटेड इम्यूनिटी विकसित होती है।

कोवैक्सीन : कोवैक्सीन की यदि बात करें तो यह भारत में विकसित हुई कोविड की पहली वैक्सीन है। इसे भारत बायोटेक द्वारा इंडियन कौंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के सहयोग से विकसित किया गया है। कोवैक्सीन वायरोन इनेक्टिवेटेड कोरोना वायरस वैक्सीन है। इसे वेरो सेल प्लेटफॉर्म पर विकसित किया जाता है। इस प्रकार की वैक्सीन को पैथोजन को न्यूट्रलाइज़ करके उत्पादित किया जाता है। इनेक्टिवेटेड वायरस संक्रामक नहीं होते और इम्यूनिटी को रोग से लड़ने में मदद करते हैं। वैक्सीन के 2 डोज 4 से 6 हफ्ते के अंतराल में रेकमेंड किए जाते हैं। दूसरी डोज़ के 14 दिनों बाद वैक्सीन के चिकित्सकीय प्रभाव देखे जाते हैं।'

रखें ध्यान

-वैक्सीन के दोनों डोज एक ही मैन्युफेक्चरर के होने चाहिए।

-जो पहले कोविड से संक्रमित हो चुके हैं, वे भी इन्हें ले सकते हैं।

- कोविड वैक्सीन लगाने का मतलब यह नहीं कि अब लापरवाही की जाए। कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर फिर भी रखना ज़रूरी है, यानी कोविड वैक्सीन लेते समय और डोज के दौरान और उसके बाद भी हैंड हाइजीन, मास्क लगाना और अन्य कोविड संबंधी सावधानियों का ज़रूर पालन करना है।

Dailyhunt
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