भारत में सोना खरीदना सिर्फ शौक नहीं, बल्कि एक बड़ा निवेश भी माना जाता, लेकिन आज भी कई लोग सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल हॉलमार्क देखकर संतुष्ट हो जाते। विशेषज्ञों का कहना है कि हॉलमार्क के साथ-साथ HUID (Hallmark Unique Identification) कोड को जांचना भी बेहद जरूरी है।
यह कोड सोने की असली पहचान सुनिश्चित करता है और नकली या गलत प्रमाणित ज्वेलरी से ग्राहकों को बचाने में मदद करता।
1 जुलाई 2021 से सरकार ने एचयूआईडी आधारित हॉलमार्किंग व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत हर हॉलमार्क वाली सोने की ज्वेलरी पर 3 प्रमुख निशान होते हैं। इनमें भारतीय मानक ब्यूरो का लोगो, सोने की शुद्धता (जैसे 22के या 18K) और 6 अंकों का अल्फान्यूमेरिक एचयूआईडी कोड शामिल होता है। वर्तमान में भारत में सोना और चांदी ही हॉलमार्किंग नियमों के दायरे में आते हैं।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एचयूआईडी एक यूनिक पहचान नंबर है, जिसे ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडडर्स ने सोने की खरीद को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए शुरू किया है। हॉलमार्क जहां सोने की शुद्धता की पुष्टि करता है, वहीं HUID कोड यह बताता है कि उस ज्वेलरी की जांच कहां हुई और उसका पूरा रिकॉर्ड बीआईसी के डेटाबेस में मौजूद है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल हॉलमार्क पर भरोसा करना काफी नहीं है। बाजार में नकली हॉलमार्क स्टैंप के मामले भी सामने आए हैं। कुछ बेईमान कारोबारी हॉलमार्क के चिन्हों की नकल कर ग्राहकों को भ्रमित कर सकते हैं। ऐसे में HUID कोड अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है, क्योंकि हर कोड डिजिटल रूप से बीआईएस के रिकॉर्ड में दर्ज होता है।
ग्राहक एचयूआईडी कोड की जांच बीआईएस केयर मोबाइल ऐप या बीआईएस की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए कर सकते हैं। कोड दर्ज करते ही ज्वेलरी की शुद्धता, जौहरी का नाम, हॉलमार्किंग सेंटर और प्रमाणन की तारीख जैसी जानकारी सामने आ जाती है। इससे ग्राहक आसानी से यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि वे असली और प्रमाणित सोना खरीद रहे हैं।
एचयूआईडी की जांच की प्रक्रिया भी बेहद आसान है। सबसे पहले ज्वेलरी पर अंकित एचयूआईडी कोड देखें। इसके बाद BIS CARE ऐप डाउनलोड करें और उसमें वेरिफिकेशन विकल्प चुनें। वहां कोड दर्ज करने पर पूरी जानकारी स्क्रीन पर दिखाई देगी। यदि जानकारी ज्वेलरी से मेल खाती है, तो उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि HUID जांच में कुछ मिनट ही लगते हैं, लेकिन यह छोटी सावधानी भविष्य में बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है। खासकर गोल्ड लोन या ज्वेलरी बेचने के समय यह प्रमाणन काफी उपयोगी साबित होता है।
(प्रियंका कुमारी)
हरिभूमि बिज़नेस डेस्क

