राजा शर्मा- डोंगरगढ़। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए वेटलिफ्टिंग की 53 किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने वाली राजनांदगांव की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव मंगलवार को धर्मनगरी डोंगरगढ़ पहुंचीं।
विश्व प्रसिद्ध मां बमलेश्वरी देवी के दरबार में माथा टेककर आशीर्वाद लेने पहुंचीं इस चैंपियन खिलाड़ी का जगह-जगह आत्मीय स्वागत हुआ। सम्मान समारोह के दौरान ज्ञानेश्वरी ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के संघर्ष और त्याग को देते हुए एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक और ओलंपिक में भारत का परचम लहराने का संकल्प दोहराया।
देश की सफलता और खेल जगत के उज्ज्वल भविष्य की कामना की
देश के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतने वाली राजनांदगांव की होनहार बेटी ज्ञानेश्वरी यादव का डोंगरगढ़ आगमन गौरव और सम्मान का अवसर बन गया। परिवार के साथ पहुंचीं ज्ञानेश्वरी ने विश्व प्रसिद्ध मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया और देश, प्रदेश की खुशहाली तथा भारतीय खिलाड़ियों की निरंतर सफलता की कामना की।
ज्ञानेश्वरी यादव के सम्मान में उमड़ा डोंगरगढ़
मंदिर दर्शन के बाद प्रेस क्लब डोंगरगढ़ सहित विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं खेल संगठनों ने पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया। उपस्थित लोगों ने उनकी उपलब्धि को पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि, ज्ञानेश्वरी ने अपने संघर्ष, अनुशासन और मेहनत से प्रदेश की बेटियों के लिए नई मिसाल कायम की है।
भावुक होकर ज्ञानेश्वरी ने साझा किया चैंपियन बनने का सफर
मीडिया से बातचीत के दौरान ज्ञानेश्वरी यादव भावुक नजर आईं। उन्होंने अपनी सफलता का पूरा श्रेय माता-पिता के संघर्ष और वर्षों के समर्पण को दिया। उन्होंने कहा कि, कठिन परिस्थितियों में उनके पिता ने परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए हर कदम पर उनका साथ दिया, जबकि उनकी मां ने उनकी डाइट, अभ्यास और मानसिक मजबूती का विशेष ध्यान रखा। परिवार का यही त्याग और विश्वास उन्हें इस मुकाम तक लेकर आया।
सरकारी सम्मान और सहयोग के लिए जताया आभार
ज्ञानेश्वरी ने छत्तीसगढ़ शासन द्वारा डीएसपी पद पर नियुक्ति तथा 30 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा पर मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि, सरकार का यह सहयोग आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी में नई ऊर्जा देगा। उन्होंने कहा कि, अब उनका पूरा ध्यान एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने और ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर भारत का तिरंगा विश्व मंच पर लहराने पर है। उन्होंने विश्वास जताया कि, कड़ी मेहनत और देशवासियों के आशीर्वाद से वे अपने अगले लक्ष्य को भी हासिल करेंगी।
संघर्ष और हौसले की मिसाल बनीं ज्ञानेश्वरी
ज्ञानेश्वरी यादव का डोंगरगढ़ दौरा केवल सम्मान का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रदेश की युवा पीढ़ी और विशेष रूप से बेटियों के लिए प्रेरणा का संदेश भी बन गया। मां बमलेश्वरी के दरबार से आशीर्वाद लेकर लौटी इस चैंपियन खिलाड़ी ने यह साबित कर दिया कि संघर्ष, समर्पण और अटूट हौसले के बल पर हर सपना साकार किया जा सकता है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें उनके एशियन गेम्स और ओलंपिक अभियान पर टिकी हैं।
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सृष्टि सिंह

