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मोहला में अवैध प्लाटिंग का बड़ा खुलासा : प्रशासन की नाक के नीचे बस गई कॉलोनी, रजिस्ट्रार से पटवारी तक सवालों के घेरे में

मोहला में अवैध प्लाटिंग का बड़ा खुलासा : प्रशासन की नाक के नीचे बस गई कॉलोनी, रजिस्ट्रार से पटवारी तक सवालों के घेरे में

निशपुरी गोस्वामी- मोहला। नवगठित मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में कृषि भूमि की अवैध प्लाटिंग का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत मोहला के आश्रित ग्राम चिलमटोला में कृषि भूमि को कथित तौर पर आवासीय प्लॉट में बदलकर बेचे जाने के मामले में राजस्व विभाग ने जांच शुरू कर दी है।

मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों, भू-माफियाओं और प्लॉट खरीदारों में हड़कंप मच गया है।

जानकारी के अनुसार, चिलमटोला में कृषि भूमि पर कथित रूप से बिना वैधानिक अनुमति के प्लाटिंग कर लोगों को ऊंची कीमतों पर प्लॉट बेचे गए। अब इन प्लॉटों पर मकानों का निर्माण शुरू हो चुका है और धीरे-धीरे अवैध कॉलोनी बसने लगी है। राजस्व विभाग अब उप पंजीयक कार्यालय और संबंधित पटवारी से पूरे मामले की जानकारी जुटा रहा है।

रजिस्ट्रार, तहसीलदार और पटवारी की भूमिका पर उठे सवाल
मामले में आरोप है कि उप पंजीयक कार्यालय ने कृषि भूमि की छोटे-छोटे हिस्सों में रजिस्ट्रियां कीं, तहसीलदार ने नामांतरण की प्रक्रिया पूरी की और पटवारी ने मूल खसरे से अलग-अलग नक्शे काटकर खरीदारों के नाम दर्ज किए। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब पूरी प्रक्रिया सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होती रही, तब अवैध प्लाटिंग पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

ग्राम पंचायत ने नहीं दी कोई अनुमति
ग्राम पंचायत मोहला के सचिव कुबेर चोरिया ने बताया कि चिलमटोला में जिन प्लॉटों पर निर्माण कार्य चल रहा है, उनके लिए पंचायत से किसी प्रकार की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने बिना पंचायत की अनुमति के मकान निर्माण शुरू कर दिया है, जिससे पंचायत को राजस्व का नुकसान हो रहा है।

खरीदारों पर भी मंडरा रहा खतरा
जिन लोगों ने जीवनभर की जमा-पूंजी लगाकर इन प्लॉटों की खरीदारी की है, वे फिलहाल राजस्व विभाग की संभावित कार्रवाई से अनजान हैं। यदि जांच में प्लाटिंग अवैध पाई जाती है तो उनके निर्माण कार्य पर भी असर पड़ सकता है।

बिजली विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में
मामले में बिजली विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जिस भूमि पर अवैध प्लाटिंग कर कॉलोनी बसाई जा रही है, वहां बिजली के खंभे और कनेक्शन की व्यवस्था भी कर दी गई। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि बिना वैधानिक स्वीकृति वाली कॉलोनी तक बिजली सुविधा कैसे पहुंच गई।

राजस्व विभाग जुटा जांच में
सूत्रों के अनुसार, राजस्व विभाग उप पंजीयक कार्यालय, तहसील और पटवारी से संबंधित दस्तावेज जुटाकर पूरे मामले की जांच कर रहा है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और अवैध प्लाटिंग में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है।

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रेवतीरमन द्विवेदी

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