
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मध्यप्रदेश मंत्रिपरिषद की बैठक में आम जनता, सरकारी कर्मचारियों, खिलाड़ियों और उद्योग जगत से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई।
कैबिनेट ने 12 साल से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया, वहीं स्वामित्व योजना के तहत ग्राम पंचायत क्षेत्रों में पट्टों के पंजीयन पर स्टाम्प ड्यूटी खत्म कर ग्रामीणों को बड़ी राहत दी।
इसके अलावा AI डेटा सेंटर विस्तार, हर जिले में IT पार्क, नगर वन विकास और हॉकी खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि समेत कई अहम घोषणाएं की गईं। आइए जानते हैं मोहन सरकार के 10 बड़े फैसले।
मोहन सरकार के 10 बड़े फैसले
1. 12 साल से लंबित कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया शुरू
मध्यप्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति (प्रमोशन) से जुड़े मामले पिछले करीब 12 वर्षों से विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक कारणों से लंबित थे। कैबिनेट ने इन मामलों के निराकरण की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी है। इससे विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों को करियर उन्नति का अवसर मिलेगा और लंबे समय से चली आ रही उनकी मांग पूरी होने की उम्मीद जगी है।
2. गांवों में पट्टों के पंजीयन पर स्टाम्प ड्यूटी पूरी तरह खत्म
स्वामित्व योजना के तहत ग्राम पंचायत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने पट्टों के पंजीयन पर लगने वाला स्टाम्प शुल्क समाप्त करने का फैसला किया है। इससे ग्रामीण परिवारों को संपत्ति के दस्तावेज तैयार कराने में कम खर्च करना पड़ेगा और भूमि स्वामित्व संबंधी प्रक्रियाएं अधिक आसान बनेंगी।
3. अतिरिक्त उपकर का भार भी अब सरकार उठाएगी
केवल स्टाम्प शुल्क ही नहीं, बल्कि पंचायत क्षेत्रों में देय अतिरिक्त उपकर (सेस) की राशि का भुगतान भी राज्य सरकार करेगी। इससे ग्रामीणों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और स्वामित्व योजना का लाभ अधिक लोगों तक पहुंच सकेगा।
4. AI और नई तकनीकों से लैस होगा प्रदेश का डेटा सेंटर
मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा स्थापित डेटा सेंटर का बड़े स्तर पर विस्तार किया जाएगा। करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा स्टोरेज और अन्य आधुनिक तकनीकी सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे डिजिटल गवर्नेंस और आईटी निवेश को नई गति मिलेगी।
5. हर जिले में IT पार्क विकसित करने की तैयारी
राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और आईटी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि उपलब्ध कराएगी। साथ ही प्रत्येक जिले में छोटे-छोटे आईटी पार्क स्थापित करने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और युवाओं को अपने ही जिले में तकनीकी क्षेत्र में काम करने का मौका मिलेगा।
6. एशिया कप विजेता हॉकी खिलाड़ियों को मिलेगा सम्मान
जापान में आयोजित अंडर-18 एशिया कप-2026 में पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीमों में शामिल मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों को राज्य सरकार प्रोत्साहन राशि देगी। स्वर्ण पदक विजेता पुरुष टीम के छह खिलाड़ियों को तीन-तीन लाख रुपये और कांस्य पदक विजेता महिला टीम की चार खिलाड़ियों को एक-एक लाख रुपये दिए जाएंगे। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाना और खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना है।
7. उज्जैन की वराहमिहिर वेधशाला का होगा आधुनिकीकरण
उज्जैन के डोंगला स्थित प्रसिद्ध वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। अगले पांच वर्षों में लगभग 39 करोड़ रुपये खर्च कर यहां अत्याधुनिक खगोलीय उपकरण, शोध सुविधाएं और तकनीकी संसाधन विकसित किए जाएंगे। इससे उज्जैन खगोल विज्ञान और वैज्ञानिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।
8. हर शहर में विकसित होंगे 'नगर वन'
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग "नमो हरित नगर योजना" के तहत प्रदेश के सभी नगरों में नगर वन विकसित करने की तैयारी कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और नागरिकों को बेहतर प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराना है।
9. गुजरात को देगा 217 करोड़ रुपये
सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े दशकों पुराने अंतर्राज्यीय मुद्दों के समाधान के तहत मध्यप्रदेश सरकार गुजरात को 217 करोड़ रुपये की राशि देगी। सरकार के अनुसार यह समझौता दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित विषयों को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिससे क्षेत्रीय विकास और समन्वय को बढ़ावा मिलेगा।
10. जल गंगा संवर्धन अभियान को मिली रिकॉर्ड सफलता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चलाए गए जल गंगा संवर्धन अभियान को प्रदेशभर में व्यापक जनसमर्थन मिला। सरकार के मुताबिक इस वर्ष 7 करोड़ से अधिक लोगों ने अभियान में भाग लिया और 3 लाख 60 हजार से ज्यादा जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्य किए गए। जल स्रोतों के संरक्षण और भूजल स्तर सुधारने की दिशा में इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
गुरजीत कौर

