
क्या आप जानते हैं कि सालभर की 24 एकादशियों का पुण्य सिर्फ एक दिन के व्रत से मिल सकता है? यही है निर्जला एकादशी की अद्भुत महिमा। यह व्रत केवल आस्था नहीं, बल्कि तप, त्याग और आत्मसंयम की सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से उपवास रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, पापों का नाश होता है और सौभाग्य के द्वार खुलते हैं।
खास बात यह है कि इस व्रत में पूरे दिन बिना जल और अन्न के रहना होता है, इसलिए इसे सभी एकादशियों में सबसे कठोर और सबसे फलदायी माना गया है। जो लोग पूरे वर्ष व्रत नहीं रख पाते, उनके लिए यह एक दिन ही पूरे साल का आध्यात्मिक लाभ देने वाला अवसर बन जाता है।
कब है निर्जला एकादशी 2026?
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जून 2026 शाम 6:12 बजे से शुरू होकर 25 जून 2026 रात 8:09 बजे तक रहेगी।
उदय तिथि के अनुसार निर्जला एकादशी व्रत 25 जून 2026 (गुरुवार) को रखा जाएगा।
पारण का समय (व्रत खोलने का समय)
26 जून 2026 सुबह 6:03 बजे से 8:42 बजे तक
इसी समय के बीच विधि-विधान से व्रत खोलना शुभ माना गया है।
पूजा के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:37 बजे से 5:20 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:15 बजे से 1:08 बजे तक
यह दोनों समय पूजा, जप और ध्यान के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं।
क्यों खास है निर्जला एकादशी?
निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, भीमसेन ने वर्षभर सभी एकादशी व्रत करने में असमर्थ होने के कारण केवल इसी एकादशी का व्रत रखा था। इसके प्रभाव से उन्हें सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त हुआ।
इस व्रत की सबसे बड़ी विशेषता
निर्जला एकादशी को पूरे दिन बिना अन्न और बिना जल के उपवास किया जाता है। इसे साल की सबसे कठिन एकादशी माना जाता है।
धार्मिक महत्व और लाभ
- इस दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है
- व्रत, जप और दान-पुण्य से पापों का नाश होता है
- मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है
- सालभर की 24 एकादशियों के बराबर फल मिलता है
यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि संयम, आस्था और श्रद्धा की परीक्षा भी है।
ध्यान रखने योग्य बातें
निर्जला व्रत बहुत कठोर होता है, इसलिए स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही व्रत रखना चाहिए। बुजुर्ग, बीमार या गर्भवती महिलाएं डॉक्टर की सलाह लें। यदि पूर्ण निर्जला संभव न हो तो श्रद्धा अनुसार आंशिक व्रत भी कर सकते हैं।
निर्जला एकादशी 2026 उन लोगों के लिए विशेष अवसर है, जो पूरे वर्ष एकादशी व्रत नहीं रख पाते। सही मुहूर्त में पूजा और नियमपूर्वक व्रत करने से अत्यधिक पुण्य फल प्राप्त होता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। इसकी सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
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