आकाश पवार- पेंड्रा। पेंड्रारोड-गेवरा रोड रेलवे परियोजना के तहत कोटमी-देवरी मुख्य मार्ग पर निर्माणाधीन रेलवे ब्रिज राहगीरों और वाहन चालकों के लिए लगातार खतरा बनता जा रहा है। करीब 10 मीटर चौड़े प्रस्तावित रेलवे ब्रिज के निर्माण के लिए सड़क के दोनों ओर बड़े पैमाने पर मिट्टी की कटाई की गई है।
इसके चलते आवागमन के लिए महज करीब 3 मीटर चौड़ा संकरा रास्ता ही बचा है।
सबसे गंभीर स्थिति यह है कि इस संकरे मार्ग के दोनों ओर गहरी खुदाई के बावजूद सुरक्षा के लिए पर्याप्त बैरिकेडिंग नहीं की गई है। वाहन चालकों को सावधान करने के लिए पर्याप्त चेतावनी बोर्ड और संकेतक भी नजर नहीं आ रहे हैं। बारिश के कारण निर्माण स्थल की स्थिति और अधिक खतरनाक हो गई है।
बारिश से धंस रही मिट्टी, सड़क पर जमा कीचड़ और पत्थर
निर्माण स्थल के दोनों ओर की गई गहरी खुदाई के चलते मिट्टी लगातार धंस रही है। बारिश के बाद सड़क पर बड़े-बड़े पत्थर, कीचड़ और पानी जमा हो जाने से वाहन चालकों को बेहद सावधानी के साथ संकरे रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से जोखिम भरी बनी हुई है। रात के समय खतरा और बढ़ जाता है। निर्माण स्थल पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने और रेडियम संकेतक नहीं लगाए जाने के कारण सड़क पर मौजूद गड्ढे, कीचड़ और किनारों की स्थिति स्पष्ट दिखाई नहीं देती। ऐसे में किसी भी समय वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खुदाई वाले हिस्से में गिर सकता है।
स्कूल बस और एंबुलेंस समेत रोजाना गुजरते हैं सैकड़ों वाहन
कोटमी-देवरी मार्ग क्षेत्र के प्रमुख मार्गों में शामिल है। इस रास्ते से प्रतिदिन बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन, यात्री वाहन, स्कूल बस, एंबुलेंस और पैदल राहगीरों का आवागमन होता है। ऐसे व्यस्त मार्ग पर निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान यह रास्ता कई बार दलदल में तब्दील हो जाता है। फिसलन के कारण लोग गिर भी चुके हैं। इसके बावजूद निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
बैरिकेडिंग और रोशनी की व्यवस्था की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और रेलवे प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीणों की मांग है कि निर्माण स्थल पर मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, रेडियम पट्टी और पर्याप्त रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही आवागमन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए जरूरत के अनुसार वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के लिए जिम्मेदार निर्माण एजेंसी के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई है।
हादसे के बाद नहीं, पहले हो सुरक्षा इंतजाम
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य जरूरी है, लेकिन लोगों की सुरक्षा उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि किसी बड़े हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने के बजाय प्रशासन और रेलवे को अभी से सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। यदि समय रहते निर्माण स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में गंभीर दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
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रेवतीरमन द्विवेदी

