
Ayodhya Janakpur Fourlane Highway: रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक बेहद सुखद समाचार है। अयोध्या से लेकर नेपाल के जनकपुर तक कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 'राम-जानकी फोरलेन मार्ग' का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर आगे बढ़ रहा है।
इस आधुनिक और भव्य हाइवे के पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद, श्रद्धालु बेहद कम समय में भगवान श्रीराम और माता सीता से जुड़े पावन धार्मिक स्थलों की यात्रा कर सकेंगे। यह महत्वाकांक्षी परियोजना केवल बुनियादी ढांचे का विकास नहीं है, बल्कि भारत और नेपाल के सांस्कृतिक ताने-बाने को जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
रामायण काल के ऐतिहासिक मार्ग का हो रहा कायाकल्प
धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम की बारात अयोध्या से इसी रास्ते से होकर राजा जनक की नगरी जनकपुर गई थी। इस मार्ग के इसी विशेष पौराणिक महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार इसे आधुनिक रूप दे रही है। इस हाइवे के बनने से देश के 'रामायण सर्किट' को एक नई मजबूती मिलेगी, जिससे आने वाले समय में इस रूट पर पर्यटन और श्रद्धालुओं की आमद कई गुना बढ़ने की उम्मीद है।
15 घंटे का थकाऊ सफर अब सिर्फ 5 घंटे में सिमटेगा
वर्तमान समय की बात करें तो अयोध्या से जनकपुर जाने के लिए यात्रियों को लगभग 459 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिसमें करीब 14 से 15 घंटे का लंबा समय लग जाता है। लेकिन जैसे ही राम-जानकी फोरलेन का निर्माण पूरा होगा, यह दूरी घटकर मात्र 369 किलोमीटर के आसपास रह जाएगी। विश्वस्तरीय सड़क और सुगम यातायात के चलते श्रद्धालु इस पूरे सफर को महज 5 से 6 घंटे में आसानी से पूरा कर सकेंगे।
₹6,155 करोड़ का मेगा बजट और 2027 का डेडलाइन
इस पूरे प्रोजेक्ट की रूपरेखा और तकनीकी पहलुओं पर नजर डालें तो इस रूट की कुल लंबाई तकरीबन 240 किलोमीटर होगी। इस विशालकाय परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए केंद्र सरकार करीब 6,155 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश कर रही है। सरकार ने इस पूरे हाईवे को साल 2027 तक चालू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके शुरू होने से उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती इलाकों की पूरी तस्वीर बदल जाएगी।
जाम से मुक्ति के लिए बनेंगे कई पुल और बाईपास
सफर को बिना किसी बाधा के सुरक्षित और रफ्तारदार बनाने के लिए इस प्रोजेक्ट में कई आधुनिक सिविल कंस्ट्रक्शन शामिल किए गए हैं। यातायात को बिना रुके चलाने के लिए सीवान, तरवारा, बसंतपुर और मशरख जैसे व्यस्त इलाकों में नए बाईपास का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा, पूरे रूट पर 1 बड़ा पुल, 14 छोटे पुल, 15 अंडरपास, 2 ग्रेड सेपरेटर और एक रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण भी किया जाएगा, ताकि यात्रियों को कहीं भी ट्रैफिक जाम का सामना न करना पड़े।
बिहार के इन जिलों की खुलेगी किस्मत, बढ़ेगा रोजगार
यह शानदार फोरलेन मार्ग उत्तर प्रदेश की पावन नगरी अयोध्या से शुरू होकर यूपी-बिहार बॉर्डर को छुएगा। इसके बाद यह बिहार के सीवान, सारण, मशरख, शिवहर और माता सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी से होते हुए सीधे नेपाल की सीमा में प्रवेश कर जनकपुर तक जाएगा। इस बेहतरीन कनेक्टिविटी से बिहार के इन पिछड़े और सुदूर जिलों में परिवहन और व्यापार को नया पंख लगेगा। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि सड़क के आसपास बड़े पैमाने पर होटल, रेस्टोरेंट, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स से जुड़े नए व्यवसाय शुरू होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे।
Vishal

