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Ram Mandir Bhoomi Pujan: बाबा मौर्य ने बनाया था 1992 में रामलला का अस्थायी टैंट, खुद बाबा ने बतायी पूरी कहानी

Ram Mandir Bhoomi Pujan: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राम मंदिर के भूमि पूजन के साथ देशभर के करोड़ों रामभक्तों का सपना साकार कर दिया। राम मंदिर के शिलान्यास के 500 साल के संघर्ष में कई लोगों ने अपना योगदान दिया। इन्हीं लोगों में से एक हैं बाबा सत्यनारायण मौर्य। बता दें कि बाबा मौर्य ने ही 1992 में बैनर के कपड़े से रामलला का अस्थाई टैंट बनाया था।

बाबा मौर्य ने बताई अपनी कहानी

बाबा मौर्य ने कहा कि पढ़ाई खत्म करने के बाद से ही वो राम मंदिर के आंदोलन से जुड़े हैं। उन्होंने शुरूआत में अयोध्या की गलियों में दीवारों पर नारा लिखकर लोगों में नई ऊर्जा जगाने की कोशिश की। उनका नारा था - रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।

मंच प्रमुख बनकर जगाया उत्साह

उन्होंने कहा कि उनके नारे विश्व हिंदु परिषद के प्रमुख अशोक सिंघल के की नजरों तक पहुंचे। वो उनसे काफी प्रभावित हुए। उन्होंने बाबा के गाने और नारे की कैसेट बनवाई। इसके बाद उन्हें मंच प्रमुख बना दिया गया। बाबा ने मंच से भी यही नारे लगाए और लोगों के उत्साह को उजागर करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

रक्त देंगे प्राण देंगे, मंदिर का निर्माण करेंगे

उन्होंने कहा कि राम मंदिर हमारा सपना था। जब हमारा कोई सपना पूरा होता है तो उससे मिली खुशी की व्याख्या करना आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि हमने इस नारे में कई पंक्तियां जोड़ी। उन्हीं में से एक थी - रक्त देंगे प्राण देंगे, मंदिर का निर्माण करेंगे। लेकिन रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे ज्यादा चलीं।

अस्थाई मंदिर बनाया

बाबा ने कहा कि जिस समय ढ़ांचा गिराया गया, उस समय मैं पेंटिंग के लिए वहीं उपस्थित था। इसके बाद मैं उज्जैन गया और 3-4 थान कपड़ा उठा लाया। ढ़ांचा गिरने के बाद हमने उसके मलबे में ही रामजी को स्थापित कर दिया। पत्थर, लकड़ी और कपड़ों की सहायता से अस्थाई मंदिर भी बना दिया। फिर हाथ से ही ईंट रखकर दीवार भी बनाने लगे।

प्रधानमंत्री नाम से जानते हैं मुझे

बाबा ने कहा कि मैंने अशोक सिंघल के साथ सात साल नरेंद्र मोदी के साथ भी काम किया। उन्होंने कहा कि मैंने प्रभू के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और मेरी ऐसी कोई इच्छा नहीं है कि कोई मुझे जाने। मेरे लिए इतना ही काफी है कि प्रधानमंत्री मुझे नाम से जानते हैं।

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