रायपुर। सोमवार को छत्तीसगढ़ सहित देश के अन्य राज्यों से आए एचआईवी और एड्स संक्रमितों की गोपनीय बैठक हुई। बैठक में संक्रमितों के प्रति अफसर और प्रशासन के व्यवहार को लेकर विरोध जताया गया।
संक्रमितों की संस्था सीजीएनपी प्लस ने आरोप लगाया कि कई महिलाओं को सामान्य होने के बाद भी उन्हें वैश्या, जिसे शॉर्ट फॉर्म में एफएसडब्ल्यू भी कहा जाता है, उस श्रेणी में डाल दिया गया है।
बैठक में यह तय किया गया कि, यदि छत्तीसगढ़ एड्स कंट्रोल सोसायटी यदि उनकी मांगे नहीं मानेगी, तो सरकार द्वारा दिए जाने वाली जीवन रक्षक एआरटी की दवा का सेवन पूरी तरह से बंद कर देंगे। इसके बाद भी उन्होंने हमारी मांगें पूरी नहीं की तो उनका समुदाय अपनी पहचान सार्वजनिक करते हुए धरना प्रदर्शन करेगा। हरिभूमि में सोमवार को एचआईवी संक्रमित समुदाय को लेकर खबर का प्रमुखता से प्रकाशन किया गया।
उपचार में भेदभाव पर जताई चिंता
बताया जा रहा है कि, जिसे बाद प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। बैठक में यह मांग प्रमुखता से उठी कि विहान सीएचसी का कार्य एचआईवी समुदाय के व्यक्तियों को फिर से दिया जाए। जिससे उनकी पहचान और गोपनीयता बरकरार रह सके। वहीं चिकित्सा व्यवस्था में उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्हें वेटिलेटर और डाइलिसिस की सुविधा भी नहीं मिलती है। जिसके कारण कई एचआईवी संक्रमितों की मौत हो चुकी है।
शिकायत की, पर सुनवाई नहीं
बैठक में यह बात भी सामने आई कि एचआईवी की दवा लेने के लिए अपने-अपने क्षेत्र में खोले गए एआरटी सेंटर से दवा दी जाती है, यहां से उनकी जानकारीगैर समुदाय या जिन्हें यह संक्रमण नहीं है, उन तक पहुंचाई जा रही है। इसी के कारण वे लोग उनके मोहल्ले में पहुंचकर एचआईवी संक्रमित की तलाश कर रहे हैं। इसकी शिकायत एड्स कंट्रोल सोसायटी से भी की गई, लेकिन कोई अपेक्षित कदम नहीं उठाया गया है।
जीना हो चुका है मुश्किल
सरकार की योजनाओ को एचआईवी/एड्स संक्रमित व्यक्तियों को पहले समुदाय के माध्यम से ही पहुंचाया जाता था। जिसके कारण हमारी गोपनीयता बनी रहती थी, लेकिन अब यह काम ऐसे लोगों को दिया जा रहा है जो कि एचआईवी की गंभीरता और संवेदनशीलता को नहीं समझ सकते। गैर एचआईवी समुदाय के लोग संक्रमितों के घर आकर बेवजह का हंगामा करते हैं। जिससे उनकी बीमारी की गोपनीयता भंग कर रहे हैं। जिसके कारण उनके घर और आसपास के लोगों को जानकारी मिल रही है, जिसके कारण उनकी जीना मुश्किल हो गया है।
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Uma Ghritlahare

