
Sawan Shiv Puja 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जल चढ़ाने का सही समय, सही दिशा और पूजा की विधि का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। आइए जानते हैं सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने के प्रमुख नियम।
सावन में कब करें शिवलिंग का जलाभिषेक?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सुबह लगभग 10 बजे तक करना सबसे शुभ माना जाता है। इस समय वातावरण शांत और सकारात्मक रहता है। इसके अलावा प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक का समय भी शिव पूजा और जलाभिषेक के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
जल चढ़ाते समय दिशा का रखें विशेष ध्यान
शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय दिशा का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। परंपरा के अनुसार श्रद्धालु दक्षिण दिशा की ओर खड़े होकर उत्तर दिशा की तरफ मुख करके जल अर्पित करें। उत्तर दिशा को भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ा शुभ स्थान माना जाता है।
किस पात्र से चढ़ाएं जल?
शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए तांबे, पीतल या चांदी के पात्र का उपयोग शुभ माना जाता है। यदि तांबे का पात्र इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसमें केवल शुद्ध जल ही रखें। दूध अर्पित करना हो तो अलग पात्र का उपयोग करना उचित माना जाता है।
ऐसे करें जलाभिषेक
- जल की धारा पतली और लगातार रखें।
- सबसे पहले जलाधारी के दाहिने भाग पर जल अर्पित करें।
- इसके बाद बाएं भाग पर जल चढ़ाएं।
- फिर मध्य भाग और जलाधारी के चारों ओर श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें।
- अंत में शिवलिंग पर धीरे-धीरे जलाभिषेक करें।
- पूरे समय "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते रहें।
- इन बातों का भी रखें ध्यान
- पूजा से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और शुद्ध जल श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
- शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल व्यर्थ न बहाएं।
- पूजा के दौरान मन को शांत रखें और श्रद्धा के साथ भगवान शिव का स्मरण करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में नियमपूर्वक और श्रद्धा के साथ किया गया जलाभिषेक भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने तथा जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता लाने वाला माना जाता है।
धर्म-संस्कृति डेस्क

