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सितंबर में होगी 'महापरीक्षा' : छत्तीसगढ़ को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने की तैयारी तेज, कलेक्टरों को विशेष अभियान चलाने के निर्देश

सितंबर में होगी 'महापरीक्षा' : छत्तीसगढ़ को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने की तैयारी तेज, कलेक्टरों को विशेष अभियान चलाने के निर्देश

रायपुर। छत्तीसगढ़ को वर्ष 2026 में शत-प्रतिशत साक्षर बनाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत सितंबर के अंतिम सप्ताह में होने वाली महापरीक्षा अभियान को सफल बनाने के लिए स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को पत्र जारी कर व्यापक स्तर पर तैयारी और प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने शेष बचे असाक्षरों का सर्वेक्षण जल्द पूरा कराने के साथ सभी चिन्हांकित शिक्षार्थियों को महापरीक्षा में शामिल कराने पर विशेष जोर दिया है।

अधूरे सर्वे को जल्द पूरा कराने के निर्देश
भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शुरू किए गए उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम का उद्देश्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के ऐसे वयस्कों को साक्षर और सशक्त बनाना है, जो स्कूली शिक्षा से वंचित रह गए हैं। कार्यक्रम के प्रथम चरण में असाक्षरों की पहचान के लिए घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया जा रहा है। हालांकि प्रदेश के कुछ ग्राम, वार्ड और अन्य क्षेत्रों में अभी भी सर्वेक्षण पूरा नहीं हुआ है। कलेक्टरों को ऐसे क्षेत्रों में अभियान चलाकर सर्वेक्षण कार्य जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

हर ग्राम और मोहल्ले में बनेगी 10 से 15 सदस्यों की टीम
निर्देश के अनुसार प्रत्येक ग्राम, पारा, टोला और मोहल्ले में ग्राम प्रभारी या वार्ड प्रभारी के नेतृत्व में 10 से 15 सदस्यीय टीम गठित की जाएगी। इसमें कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एनएसएस, एनसीसी के सदस्य तथा संबंधित क्षेत्र के युवक-युवतियों सहित शासकीय और अशासकीय सदस्यों को शामिल किया जा सकता है। सर्वेक्षक और स्वयंसेवी शिक्षकों का चयन करते समय प्रत्येक 5 से 10 असाक्षरों के लिए एक साक्षरता केंद्र चिन्हांकित करने के निर्देश दिए गए हैं। यथासंभव विद्यालय भवन को साक्षरता केंद्र के रूप में उपयोग करने पर जोर दिया गया है।

15 सितंबर तक पोर्टल पर अपलोड करना होगा विवरण
सभी पंजीकृत शिक्षार्थियों और स्वयंसेवी शिक्षकों का विवरण 15 सितंबर 2026 तक उल्लास मोबाइल एप के माध्यम से उल्लास पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। मार्च में आयोजित महापरीक्षा अभियान में शामिल होकर असफल रहे शिक्षार्थियों को भी आगामी परीक्षा में शामिल कराया जाएगा।

10 शिक्षार्थियों को सफल कराने पर विद्यार्थियों को मिलेंगे 10 बोनस अंक
साक्षरता अभियान में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया है। 10 शिक्षार्थियों को सफल कराने वाले विद्यार्थियों को 10 बोनस अंक दिए जाएंगे। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस प्रावधान का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी अभियान से जुड़ सकें।

पंचायत से लेकर एनएसएस-एनसीसी तक को दी जा सकती है जिम्मेदारी
प्रत्येक शिक्षार्थी को साक्षरता केंद्र में नियमित पठन-पाठन कराने और इसके बाद महापरीक्षा में शामिल कराकर सफल बनाने के लिए पंचायती राज संस्थाओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, राष्ट्रीय आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूहों, हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों के विद्यार्थियों तथा एनसीसी और एनएसएस के सदस्यों की मदद ली जा सकती है।

सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म से होगा प्रचार
महापरीक्षा अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भी प्रभावी उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब के साथ टीवी, रेडियो, न्यूज चैनल और पॉडकास्ट जैसे माध्यमों से अभियान की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाई जाएगी। इसके साथ ही भारत सरकार द्वारा 1 से 15 सितंबर 2026 तक देशव्यापी साक्षरता पखवाड़ा और अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में भी उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

सितंबर के अंतिम सप्ताह में होगी महापरीक्षा
आगामी महापरीक्षा अभियान सितंबर माह के अंतिम सप्ताह में आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। इसमें सर्वेक्षण के दौरान चिन्हांकित सभी असाक्षरों को शामिल कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए साक्षरता केंद्रों में कक्षाओं का संचालन निरंतर जारी रखने को कहा गया है।

शत-प्रतिशत साक्षरता लक्ष्य पर रहेगी नजर
कार्यक्रम की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए जिलों में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जा सकती है। जिलावार सर्वेक्षित असाक्षरों की संख्या भी कलेक्टरों को उपलब्ध कराई गई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस अभियान की प्रगति की समय-सीमा की बैठकों में नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं, ताकि राज्य को 2026 में शत-प्रतिशत साक्षर बनाने के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

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सृष्टि सिंह

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