
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में अब पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि, शहर के 29 वार्डों से लिए गए 240 पानी के सैंपलों में से 98 प्रतिशत गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाए गए हैं।
कांग्रेस ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए भाजपा सरकार, प्रभारी मंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री और इंदौर महापौर पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद शहर की पेयजल व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, '2 कैबिनेट मंत्री, 9 के 9 विधायक, 1 सांसद, 1 महापौर...इंदौर में जनता ने भाजपा को 100% सीटें दीं और बदले में भाजपा जनता को 98% दूषित पीने का पानी दे रही है।'

'इंदौर के प्रभारी मंत्री स्वयं मुख्यमंत्री मोहन यादव हैं। नगरीय प्रशासन मंत्री भी इंदौर से हैं। इंदौर के सांसद, विधायक और महापौर, सभी भाजपा के हैं।
फिर भी यह मल्टीपल इंजन सरकार इंदौर की जनता को विकास नहीं बल्कि मल्टीपल अत्याचार दे रही है।'
दूषित पानी के कारण हुई थी 36 लोगों की मौत
इंदौर में दूषित पानी के कारण 36 लोगों की मौत हुई थी। इस गंभीर घटना के बाद कांग्रेस ने इंदौर की 7 विधानसभा क्षेत्रों के 29 वार्डों से पीने के पानी के 240 सैंपल एकत्र किए और उनकी जांच करवाई। कांग्रेस का दावा है कि, इनमें से 98% सैंपल गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाए गए।
पानी में ई. कोलाई, कोलीफॉर्म बैक्टीरिया
जीतू पटवारी ने कहा कि, ट्रिपल इंजन सरकार के दौर में इंदौर के 98% घरों तक पहुंच रहा पानी पीने योग्य नहीं पाया गया। कांग्रेस के अनुसार रिपोर्ट में पाया गया कि, पानी में ई. कोलाई, कोलीफॉर्म बैक्टीरिया सहित कई हानिकारक तत्व निर्धारित मानकों से अधिक मात्रा में मिले, जो डायरिया, टाइफाइड और पीलिया जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में विफल
जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए कहा कि, '36 मौतों के बाद भी इंदौर नगर निगम नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में विफल साबित हो रहा है। भाजपा की निकम्मी नगर निगम और सरकार इंदौर की जनता को सरकारी नलों के माध्यम से जहर पिला रही है।'
गुरजीत कौर

