गोपी कश्यप- नगरी। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के 34 गांवों के सर्वांगीण विकास की दिशा में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने पहल तेज कर दी है। जिला स्तरीय बैठक के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने कहा कि, सरकार का उद्देश्य वन और वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ वनांचल में रहने वाले लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, आवास, रोजगार और सम्मानजनक जीवन की सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
प्रत्येक परिवार तक विकास की योजनाएं पहुंचे
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के 34 ग्रामों के विकास को लेकर शुक्रवार को नगरी में आयोजित जिला स्तरीय बैठक के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार प्रकृति संरक्षण और वनांचल के लोगों के विकास को समान प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा है कि दूरस्थ वन क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक परिवार तक विकास की योजनाओं का लाभ पहुंचे और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए।
जंगलों या प्राकृतिक संसाधनों से कोई समझौता नहीं होगा- सार्वा
अरुण सार्वा ने स्पष्ट किया कि, टाइगर रिजर्व क्षेत्र में होने वाले सभी विकास कार्य शासन के नियमों और पर्यावरणीय प्रावधानों के अनुरूप किए जाएंगे। विकास के नाम पर जंगलों या प्राकृतिक संसाधनों से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने अधिकारियों को सुझाव दिया कि, वन संरक्षण के साथ स्थानीय ग्रामीणों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
उपयोगी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे- सार्वा
उन्होंने कहा कि, क्षेत्र में केवल औपचारिक पौधरोपण के बजाय आम, कटहल, जामुन, आंवला, इमली, महुआ, करंज सहित फलदार और उपयोगी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएं। इससे ग्रामीण स्वयं पौधों की सुरक्षा करेंगे और भविष्य में फल एवं लघु वनोपज के माध्यम से अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे।
ऐसे किया जा सकता है आवागमन सुनिश्चित
जिला पंचायत अध्यक्ष ने बताया कि, जहां टाइगर रिजर्व के नियमों के कारण स्थायी पुलों का निर्माण संभव नहीं है, वहां मजबूत लोहे के अस्थायी पुल बनाए जा सकते हैं। वहीं, जहां पक्की सड़कें नहीं बन सकतीं, वहां स्वीकृत तकनीक से मजबूत मुरुम अथवा मिट्टी की टिकाऊ सड़कें विकसित कर वर्षभर आवागमन सुनिश्चित किया जा सकता है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ बिजली का भी समाधान
बिजली व्यवस्था को लेकर उन्होंने कहा कि दूरस्थ वनांचल में सौर ऊर्जा सबसे प्रभावी विकल्प है। प्रत्येक गांव और जरूरतमंद परिवार तक सोलर आधारित बिजली व्यवस्था पहुंचाकर ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ बिजली की समस्या का भी स्थायी समाधान मिलेगा।
ग्रामीणों को मिलेगा आय के नए अवसर
अरुण सार्वा ने कहा कि, क्षेत्र में बनने वाले आवास स्थानीय आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक वास्तुकला के अनुरूप तैयार किए जाएं। भविष्य में इन्हें होम-स्टे के रूप में विकसित कर पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है, जिससे ग्रामीणों को अतिरिक्त आय और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
उन्होंने कहा कि, उदंती-सीतानदी क्षेत्र में इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। मांदागिरी पर्वत, सीतानदी और सोंढुर जलाशय जैसे प्राकृतिक स्थलों को उनकी मूल सुंदरता के साथ विकसित किया जाना चाहिए। यहां नेचर ट्रेल, व्यू-पॉइंट, प्रकृति व्याख्या केंद्र, नियंत्रित कैंपिंग, स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प और वन उत्पाद बिक्री केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित कर पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
वनांचल के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का उद्देश्य- सार्वा
अरुण सार्वा ने कहा कि, सरकार का उद्देश्य केवल आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि वनांचल के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय ग्रामीणों के सामूहिक प्रयासों से उदंती-सीतानदी क्षेत्र विकास और प्रकृति संरक्षण का आदर्श मॉडल बनेगा, जहां जंगल, वन्यजीव और ग्रामीण तीनों का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध होगा।
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सृष्टि सिंह

