
उत्तर प्रदेश में आगामी जनगणना-2027 की तैयारियाँ युद्धस्तर पर चल रही हैं। आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए इस बार नागरिकों को 'स्वगणना' का विकल्प दिया गया है। 7 मई से शुरू हुई इस प्रक्रिया में प्रदेश की जनता बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, महज चार दिनों के भीतर ही स्वगणना फॉर्म भरने वालों की संख्या 7.16 लाख को पार कर गई है। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि साक्षरता और संसाधनों के मामले में आगे रहने वाली राजधानी लखनऊ इस डिजिटल मुहिम में काफी पिछड़ गई है।
सोनभद्र जिला रहा प्रदेश में अव्वल
स्वगणना के मामले में औद्योगिक और जनजातीय बहुल जिला सोनभद्र पूरे प्रदेश में नंबर-1 पर बना हुआ है। सोनभद्र में अब तक 1.25 लाख से अधिक परिवारों ने ऑनलाइन पोर्टल पर अपना विवरण दर्ज कराया है। जिला प्रशासन की सक्रियता और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल जागरूकता के कारण सोनभद्र ने बड़े-बड़े शहरों को पीछे छोड़ दिया है।
आजमगढ़ और बरेली टॉप-3 में शामिल
स्वगणना की इस दौड़ में आजमगढ़ जिला दूसरे स्थान पर है, जहाँ अब तक 50 हजार से अधिक फॉर्म भरे गए हैं। वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बरेली जिला 38 हजार फॉर्मों के साथ तीसरे स्थान पर काबिज है। इन जिलों में स्वगणना की रफ्तार यह संकेत दे रही है कि लोग अब सरकारी गणना कर्मियों का घर आने का इंतजार करने के बजाय खुद अपनी जानकारी अपडेट करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
राजधानी लखनऊ की स्थिति चिंताजनक
हैरानी की बात यह है कि राजधानी लखनऊ स्वगणना के पायदान पर काफी नीचे है। लखनऊ अब तक प्रदेश के 75 जिलों की सूची में 47वें नंबर पर है। यहाँ अब तक केवल 17 हजार 108 फॉर्म ही भरे जा सके हैं। जनगणना अधिकारियों ने इस पर चिंता जताते हुए लखनऊ के नागरिकों से अपील की है कि वे इस डिजिटल प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें ताकि गणना कार्य को सटीकता और तेजी से पूरा किया जा सके।
21 मई तक है मौका, ऐसे भरें फॉर्म
स्वगणना की यह प्रक्रिया 21 मई 2026 तक जारी रहेगी। इसके तहत परिवार के मुखिया को स्वयं जनगणना पोर्टल पर जाकर लॉगिन करना होगा और अपने परिवार के सदस्यों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को भरकर सबमिट करना होगा। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोग स्वगणना का विकल्प चुनें ताकि डेटा संग्रह में त्रुटियों की संभावना कम हो और समय की बचत की जा सके।
अभिषेक यादव

