
उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव 2026 को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच सुल्तानपुर जिले के प्रभारी और पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक महत्वपूर्ण बयान देकर राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
जिले के दौरे पर आए राजभर ने मीडिया से मुखातिब होते हुए साफ किया कि पंचायतों का भविष्य और चुनाव की तारीखें पूरी तरह से कानूनी प्रक्रियाओं और अदालती फैसलों के अधीन होंगी। उनके इस बयान ने कार्यकाल विस्तार और प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर चल रही चर्चाओं को नई दिशा दी है।
पंचायतों के कार्यकाल और चुनाव पर राजभर का रुख
जिले में मीडिया से बातचीत करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा समय पर चुनाव कराने की है, लेकिन सब कुछ हाईकोर्ट के निर्देशों पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि यदि किन्हीं कारणों से चुनाव समय पर नहीं हो पाते हैं, तो कोर्ट के आदेशानुसार ही पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाया जाएगा या फिर वहां प्रशासकों की नियुक्ति की जाएगी। मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि सरकार कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही अगला कदम उठाएगी ताकि चुनाव प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
महिला आरक्षण और विपक्ष पर तीखा प्रहार
राजभर ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महिला सशक्तिकरण की योजनाओं का जिक्र करते हुए विपक्ष को जमकर घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए परिसीमन कराना चाहते थे, लेकिन सपा और कांग्रेस ने इसमें अड़ंगा लगा दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष कभी नहीं चाहता कि देश की महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार मिले और वे राजनीति के मुख्य मंच पर आएं। राजभर के मुताबिक, विपक्ष केवल श्रेय की राजनीति कर रहा है।
सीटों के निर्धारण और जनगणना का गणित और भविष्य की राह
ओम प्रकाश राजभर मंत्री ने आबादी के अनुसार सीटों के बढ़ते दबाव पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने तर्क दिया कि जब देश की आबादी 68 करोड़ थी, तब लोकसभा में 545 सीटें तय की गई थीं। 2011 की जनगणना के आंकड़ों को देखें तो अब सीटों की संख्या बढ़कर 815 होनी चाहिए। राजभर ने आरोप लगाया कि जब सरकार इस दिशा में कदम उठाती है, तो विपक्ष साथ देने के बजाय संसद में बिल गिराने का काम करता है। उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जो बिल 30 साल से लटका था, उसे मोदी सरकार लागू करना चाहती है तो विरोध हो रहा है।
सियासी गलियारों में चर्चा और भविष्य की राह
ओम प्रकाश राजभर के इस बयान के बाद अब सबकी नजरें हाईकोर्ट के रुख और सरकार की अगली तैयारियों पर टिकी हैं। पंचायतों में कार्यकाल बढ़ने की संभावनाओं ने मौजूदा प्रतिनिधियों को थोड़ी राहत दी है, लेकिन प्रशासकों की नियुक्ति का डर भी बरकरार है। सुल्तानपुर से दिया गया यह बयान पूरे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग चुनावी बिगुल फूंकने के लिए क्या नई समय-सीमा तय करते हैं।
अभिषेक यादव

