Dailyhunt
'बेटा जूते तो पहन जाता`, बिलख रही मां, नाना की चिता पर ही पोते का अंतिम' संस्कार.

'बेटा जूते तो पहन जाता`, बिलख रही मां, नाना की चिता पर ही पोते का अंतिम' संस्कार.

ध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के उमरानाला में हुए भीषण बस हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में जान गंवाने वाले शिवनगर कॉलोनी के 5 वर्षीय मासूम वंश और उसके नाना कमल उर्फ खेमराज डेहरिया की कहानी ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं।

परिवार ने सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए मासूम को दफनाने के बजाय उसके नाना की चिता पर ही मुखाग्नि दी, ताकि जीवनभर साथ रहने वाली यह जोड़ी मौत के बाद भी अलग न हो सके।

घटना से पहले गुरुवार शाम पेशे से ड्राइवर खेमराज डेहरिया अपनी ड्यूटी पूरी कर घर लौटे थे और उन्हें कुछ ग्रामीणों को छोड़ने के लिए फिर निकलना था। इसी दौरान 5 साल के वंश ने अपने नाना के साथ जाने की जिद पकड़ ली। उसकी मां निकिता ने उसे रोकने की काफी कोशिश की, यहां तक कि मंदिर ले जाने का लालच भी दिया, लेकिन वंश बिना जूते पहने ही अपने नाना के साथ बस में सवार हो गया। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनका आखिरी सफर होगा। निकिता ने भावुक होकर बताया कि उन्होंने बेटे को बहुत रोका, लेकिन वह नहीं माना और अब दोनों कभी लौटकर नहीं आएंगे।

आमतौर पर हिंदू परंपरा में छोटे बच्चों को दफनाया जाता है, लेकिन इस मामले में परिवार ने भावनाओं को प्राथमिकता देते हुए एक अनोखा फैसला लिया। परिवार के मुखिया मोहन डेहरिया ने कहा कि जब दोनों एक-दूसरे के बिना एक पल नहीं रहते थे, तो अंतिम विदाई भी साथ ही दी जानी चाहिए। इसी सोच के साथ नाना के साथ ही मासूम की चिता सजाई गई। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है और विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हादसे समाज पर गहरा भावनात्मक प्रभाव छोड़ते हैं, खासकर अपनों को खोने के दर्द के रूप में।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Himachal Fast News