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क्या नाटो छोड़ देगा अमेरिका? ईरान युद्ध में अकेले पड़ने पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, कागज का शेर बताकर गठबंधन से निकलने की दी धमकी

क्या नाटो छोड़ देगा अमेरिका? ईरान युद्ध में अकेले पड़ने पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, कागज का शेर बताकर गठबंधन से निकलने की दी धमकी

वॉशिंगटन : दुनिया के सबसे शक्तिशाली सैन्य गठबंधन नाटो (NATO) के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है।

ब्रिटिश अखबार 'द टेलीग्राफ' को दिए एक विस्फोटक इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका को नाटो से बाहर निकालने पर 'गंभीरता' से विचार कर रहे हैं। ट्रंप की यह नाराजगी ईरान के साथ जारी भीषण संघर्ष में नाटो देशों द्वारा अमेरिका का साथ न देने के कारण उपजी है। ट्रंप ने तंज कसते हुए इस गठबंधन को 'कागज का शेर' करार दिया है।

ईरान युद्ध ने खोली पोल: अकेले पड़े ट्रंप का फूटा गुस्सा
करीब एक महीने पहले जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे, तब माना जा रहा था कि नाटो के सहयोगी देश अमेरिका के कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होंगे। लेकिन हकीकत इसके उलट रही। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के अधिकतर देशों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह युद्ध अमेरिका ने खुद शुरू किया है, इसलिए वे इसमें नहीं कूदेंगे। सहयोगियों के इस ठंडे रवैये से ट्रंप आगबबूला हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लगातार पोस्ट कर सहयोगियों को डरपोक बताया और उन पर गठबंधन की शर्तों को तोड़ने का आरोप लगाया।

क्या है नाटो और क्यों ट्रंप इसे बोझ मानते हैं?
नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) की स्थापना 1949 में सोवियत संघ के विस्तार को रोकने के लिए की गई थी। वर्तमान में इसमें 32 सदस्य देश हैं। ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका इस गठबंधन के खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग 15.8%) उठाता है, जबकि यूरोपीय देश अपनी रक्षा पर अपनी जीडीपी का 2% भी खर्च नहीं करते। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका दूसरों की सुरक्षा का ठेका लेकर बैठा है, जबकि जरूरत पड़ने पर ये देश गायब हो जाते हैं। वे 2017 से ही नाटो को 'अप्रासंगिक' बताकर इसे छोड़ने की धमकी देते रहे हैं।

क्या वाकई नाटो छोड़ सकते हैं ट्रंप? कानूनी पेच और 'क्वाइट क्विटिंग'
भले ही ट्रंप नाटो छोड़ने का दम भर रहे हों, लेकिन यह इतना आसान नहीं है। अमेरिका के संविधान और हालिया कानूनों के मुताबिक:

संसद की मंजूरी अनिवार्य: 2023 में पारित एक कानून के तहत, किसी भी राष्ट्रपति को नाटो छोड़ने के लिए सीनेट (संसद) में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।

सुप्रीम कोर्ट की बाधा: चूंकि नाटो एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, इसलिए राष्ट्रपति का एकतरफा फैसला सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिया जा सकता है, जिससे एक बड़ा संवैधानिक संकट पैदा हो जाएगा।

चुपचाप दूरी (Quiet Quitting): विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ट्रंप कानूनी रूप से बाहर नहीं निकल पाए, तो वे 'क्वाइट क्विटिंग' का रास्ता चुन सकते हैं। यानी अमेरिका आधिकारिक तौर पर तो नाटो में रहेगा, लेकिन वह सैन्य मदद देना और फंड रोकना शुरू कर देगा, जिससे यह गठबंधन अपने आप दम तोड़ देगा।

अगर अमेरिका हटा तो क्या होगा असर?
अगर दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति नाटो से अलग होती है, तो इसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं। यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी और रूस जैसे देशों का मनोबल बढ़ेगा। साथ ही, वैश्विक स्तर पर अमेरिका का दबदबा कम होगा और कई छोटे देश अपनी सुरक्षा के लिए चीन या रूस की ओर देखने को मजबूर हो जाएंगे। फिलहाल, ट्रंप की इस धमकी ने ब्रुसेल्स से लेकर लंदन तक के सत्ता गलियारों में खौफ पैदा कर दिया है।

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