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पीरियड्स में भी नहीं बख्शा- नवविवाहिता ने मायके में लगाई फांसी सुसाइड नोट में लिखा मां..बेटे को कभी माफ नहीं करूंगी'.

पीरियड्स में भी नहीं बख्शा- नवविवाहिता ने मायके में लगाई फांसी सुसाइड नोट में लिखा मां..बेटे को कभी माफ नहीं करूंगी'.

ध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के हनुमना थाना क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक 24 वर्षीय नवविवाहिता, जिसके हाथों की मेहंदी का रंग अभी ठीक से उतरा भी नहीं था, उसने मौत को गले लगा लिया।

पांती मिश्राम गांव में करुणा द्विवेदी नाम की युवती ने अपने मायके में फांसी लगाकर जान दे दी। लेकिन यह मामला सिर्फ खुदकुशी का नहीं है, बल्कि उस प्रताड़ना और दर्द की कहानी है जो करुणा ने 10 पन्नों के सुसाइड नोट में लिखी है। मरने से पहले उसने अपने पति और सास पर जो आरोप लगाए हैं, वो रूह कंपा देने वाले हैं।

रिश्तों की बलिवेदी पर एक और बेटी की जान चली गई। मऊगंज के पांती मिश्राम गांव में 24 साल की करुणा द्विवेदी का शव जब सुबह फंदे से झूलता मिला, तो पूरे इलाके में मातम छा गया। करुणा की शादी पिछले साल 8 मई को हुई थी, लेकिन सुसाइड नोट की मानें तो ससुराल उसके लिए किसी नर्क से कम नहीं था। करुणा ने मरने से पहले 10 पन्नों का एक लंबा सुसाइड नोट छोड़ा है। इसमें उसने अपनी जिंदगी के हर जख्म को स्याही से उकेरा है। नोट में लिखा है कि उसे पति और सास द्वारा लगातार प्रताड़ित किया जाता था। करुणा ने आरोप लगाया कि पीरियड्स के दौरान भी उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए जाते थे, और विरोध करने पर उसे बेरहमी से पीटा जाता था। करुणा ने अपने पत्र में साफ लिखा- "मैं तुम दोनों मां-बेटे को कभी माफ नहीं करूंगी, जो जुल्म मुझ पर किए उसका फल तुम्हें जरूर मिलेगा।"

मृतका के भाई कुलदीप के मुताबिक, करुणा की मां ने अपना खेत बेचकर करीब 15 से 20 लाख रुपये शादी में खर्च किए थे, लेकिन दहेज के लोभियों को यह कम लगा। आए दिन उसे ताने दिए जाते और मारपीट की जाती। थक हार कर 14 नवंबर को भाई अपनी बहन को वापस मायके ले आया था, लेकिन करुणा के मन में लगे गहरे जख्म उसे जीने नहीं दे रहे थे। करुणा ने अपने सुसाइड नोट में मोबाइल का पासवर्ड भी साझा किया है, जिसमें प्रताड़ना के कई सबूत और कॉल रिकॉर्डिंग्स होने का दावा किया गया है। फिलहाल हाटा चौकी पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच एसडीओपी स्तर पर की जा रही है। अब देखना यह है कि क्या करुणा के उन 10 पन्नों के दर्द को इंसाफ मिल पाएगा?

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