वन पर्व रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) के अवसर पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने भारत और विदेशों में रह रहे तमाम भारतीयों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोक सभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने अलग-अलग संदेश जारी कर इस त्यौहार को सामाजिक सौहार्द, सुरक्षा और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक बताया।
संदेश बहुत खास है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में रक्षाबंधन की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक जड़ों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन की पवित्र परंपरा प्राचीन काल से ही हमारी भारतीय उपासना और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है।
### प्राचीन संस्कृति से जुड़ा रक्षा सूत्र: राष्ट्रपति का संदेश
राष्ट्रपति मुर्मु ने रक्षा सूत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए प्राचीन मंत्रों का संदर्भ दिया। उन्होंने बताया कि शास्त्रों और श्लोकों में 'रक्षै, मा चल, मा चल' शब्दों के जरिए यह प्रार्थना की जाती है कि रक्षा का यह पवित्र बंधन सदैव अचल और दृढ़ रहे।
राष्ट्रपति ने कहा, "समय बीतने के साथ यह पर्व बहन की सुरक्षा के लिए भाई की कलाई पर राखी बांधने के एक अत्यंत भावपूर्ण सामाजिक उत्सव में बदल गया। यह त्योहार केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं है, बल्कि मित्रों, परिवार और समाज के अलग-अलग सदस्यों के बीच आपसी सम्मान, आत्मीयता और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का अहसास मजबूत करता है।"
दरअसल, जीवन के हर रिश्ते की नींव विश्वास, संवेदनशीलता और परस्पर सहयोग पर ही टिकती है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने देशवासियों से आह्वान किया कि इस शुभ अवसर पर हम सब समाज और राष्ट्र की रक्षा का संकल्प लें। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इसी सामूहिक सोच के बल पर भारत 'विकसित भारत' (Viksit Bharat) के सपने को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
### पीएम मोदी ने अटूट विश्वास की कामना की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से देशवासियों को इस त्यौहार की बधाई दी। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में लिखा कि रक्षाबंधन का यह पावन पर्व हर भारतीय के जीवन में खुशहाली, समृद्धि और सफलता लेकर आए।
पीएम मोदी ने कामना की कि लोगों के बीच स्नेह, अपनत्व और परस्पर विश्वास की डोर हमेशा अटूट बनी रहे। त्योहार के इस माहौल में प्रधानमंत्री का यह संदेश आपसी भाईचारे को सुदृढ़ करने पर बल देता है।
### महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा का संकल्प: ओम बिड़ला
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने भी एक्स पर अपना संदेश साझा करते हुए रक्षाबंधन को भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों की रीढ़ करार दिया। उन्होंने लिखा कि रक्षाबंधन महज एक धागा बांधने की रस्म नहीं है, बल्कि यह जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाने, प्रेम और सम्मान देने का उत्सव है।
स्पीकर बिड़ला ने रक्षा के विचार को एक नया और व्यापक आयाम दिया। उन्होंने स्पष्ट किया, "हमारी परंपरा में रक्षा का मतलब केवल बहन की शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है। असल में यह समाज की हर महिला के सम्मान, उसकी गरिमा, उसके मौलिक अधिकारों और उसके सपनों की रक्षा का संकल्प है।"
उनका मानना है कि जब देश की हर बेटी और बहन सुरक्षित माहौल में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेगी, तभी भारत वास्तविक अर्थों में एक सशक्त राष्ट्र बन सकेगा।
### श्रावणी पूर्णिमा का सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ
भारतीय पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। वैदिक परंपरा में इस दिन को उपाकर्म और श्रावणी पर्व के रूप में भी जाना जाता है, जहां विद्वान और साधक अपने ज्ञान व संकल्प का नवीनीकरण करते हैं।
ऐतिहासिक रूप से रक्षा सूत्र बांधने की परिपाटी केवल पारिवारिक रिश्तों तक सीमित नहीं थी। प्राचीन काल में गुरु अपने शिष्यों को और रक्षक अपने योद्धाओं को रक्षा सूत्र बांधकर कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने का आशीर्वाद देते थे। आज के दौर में यह पर्व सामाजिक समरसता, नारी सशक्तिकरण और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का एक बड़ा माध्यम बन चुका है।

