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शराबियों की खैर नहीं! अब जाम छलकाया तो कटेगा राशन कार्ड, सरकारी योजनाओं से भी धोना पड़ेगा हाथ; पंचायत का बड़ा फैसला

शराबियों की खैर नहीं! अब जाम छलकाया तो कटेगा राशन कार्ड, सरकारी योजनाओं से भी धोना पड़ेगा हाथ; पंचायत का बड़ा फैसला

र्मदापुरम : मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले के डोंगरवाड़ा गांव ने नशामुक्ति की दिशा में एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। गांव को पूरी तरह शराब मुक्त बनाने के लिए पंचायत ने एक कड़ा और ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किया है।

अब यदि गांव में कोई भी व्यक्ति शराब पीते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे मिलने वाली सभी सरकारी सुविधाएं तत्काल प्रभाव से बंद कर दी जाएंगी। इसमें राशन कार्ड निरस्त करने से लेकर पीएम आवास योजना तक के लाभ शामिल हैं।

सरकारी योजनाओं पर 'नशामुक्ति' का पहरा
सरपंच माखन मीना के नेतृत्व में पंचायत ने यह सख्त निर्णय ग्रामीणों की शराब की लत छुड़ाने के लिए लिया है। प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई ग्रामीण शराब का सेवन करता है, तो उसे पंचायत से मिलने वाली निम्नलिखित सुविधाओं से वंचित कर दिया जाएगा:

  • राशन कार्ड: तत्काल प्रभाव से निरस्त होगा।
  • पीएम आवास: योजना की पात्रता खत्म कर दी जाएगी।
  • नल-जल योजना: घर का पानी कनेक्शन काटा जा सकता है।
  • अन्य लाभ: स्वास्थ्य और पंचायत की अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा।

'तीसरी आंख' और युवाओं की टोली रखेगी नजर
डोंगरवाड़ा गांव, जिसमें लगभग 350 घर और 1500 के करीब मतदाता हैं, वहां अब निगरानी के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। गांव के प्रमुख चौराहों जैसे माता चौक, राधा-कृष्ण मंदिर और स्कूलों के पास 6 हाई-टेक सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा, गांव के युवाओं की एक विशेष टोली बनाई गई है जो इस बात की जांच करेगी कि कोई बाहर से शराब पीकर तो नहीं आया है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर यह टोली तुरंत एक्शन लेगी।

घर-परिवार में कलह रोकने की कवायद
सरपंच का कहना है कि गांव में शराब की अवैध बिक्री तो बंद करा दी गई थी, लेकिन कई लोग बाहर से पीकर आते थे और घर में महिलाओं व बच्चों के साथ मारपीट करते थे। इससे न केवल गांव का माहौल खराब हो रहा था, बल्कि परिवारों की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ रही थी। इसी सामाजिक और आर्थिक पतन को रोकने के लिए यह 'सर्जिकल स्ट्राइक' की गई है।

अधिकारियों ने थपथपाई पीठ
जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कड़े फैसलों से युवाओं को सही दिशा मिलेगी और पंचायत की सामाजिक उन्नति होगी। डोंगरवाड़ा अब अन्य गांवों के लिए एक मिजाज-ए-मिसाल बन गया है। पंचायत का मानना है कि जब सरकारी योजनाओं का लाभ रुकने का डर होगा, तभी लोग इस जानलेवा लत से दूरी बनाएंगे।

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