Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
'कमर्शियल गतिविधियों की जगह बन गए हैं पुलिस स्टेशन', HC की फटकार, DGP से मांगी रिपोर्ट​

'कमर्शियल गतिविधियों की जगह बन गए हैं पुलिस स्टेशन', HC की फटकार, DGP से मांगी रिपोर्ट​

Himachal Se 2 weeks ago

लाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस स्टेशनों के कामकाज पर चिंता जताई है. कोर्ट ने कहा कि ये जगहें अब कमर्शियल गतिविधियों का केंद्र बन गई हैं और पुलिसकर्मी राज्य में कानूनव्यवस्था बनाए रखने के बजाय लगातार बिजनेस की गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं.

इस बात को ध्यान में रखते हुए जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को बलिया के एक पुलिस कॉन्स्टेबल के कथित ट्रांसपोर्ट बिजनेस की जांच करने का निर्देश दिया है.

कोर्ट ने DGP और एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को बलिया जिले के रसरा पुलिस स्टेशन के सभी पुलिस अधिकारियों और कॉन्स्टेबलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का भी निर्देश दिया. डीजीपी को निर्देश दिया गया है कि वो 10 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई का ब्यौरा देते हुए कोर्ट में हलफनामा दाखिल करें.

कोर्ट ने कॉन्स्टेबल संतोष कुमार से की बात

कोर्ट ने ये टिप्पणी याचिकाकर्ता हरेंद्र यादव के ट्रक को असिस्टेंट रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर , बलिया द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान की. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई एक सबइंस्पेक्टर द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर की गई थी, जो हरेंद्र यादव और रसरा पुलिस स्टेशन में तैनात कॉन्स्टेबल संतोष कुमार के बीच मालिकाना हक के विवाद से संबंधित थी.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कॉन्स्टेबल से बात की, जिसने बताया कि उसने अपने GPF अकाउंट से पैसे निकाले थे और अपने भाई के नाम पर हरेंद्र यादव के साथ बिजनेस शुरू किया था, जिसमें एक ट्रक खरीदा गया और उसे हरेंद्र यादव द्वारा चलाया गया. कोर्ट ने पाया कि ARTO ने मालिकाना हक के विवाद के बारे में सबइंस्पेक्टर शिव मूर्ति तिवारी द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर ही गाड़ी को ब्लैकलिस्ट किया था.

बलिया के एसपी पर भी उठे सवाल

कोर्ट ने यह भी गौर किया कि बलिया के एसपी ने अपने हलफनामे में कहीं भी यह नहीं बताया था कि पुलिस स्टेशन में तैनात रहते हुए ट्रांसपोर्ट बिजनेस चलाने के लिए कॉन्स्टेबल के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई थी. हालात पर हैरानी जताते हुए कोर्ट ने कहा, 'यह कोर्ट हैरान है कि पुलिस स्टेशन कमर्शियल गतिविधियों की जगह बन गए हैं और पुलिसकर्मी राज्य में कानूनव्यवस्था बनाए रखने के बजाय बिजनेस की गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अगर यही स्थिति रही तो कानूनव्यवस्था बनाए नहीं रखी जा सकती, क्योंकि पुलिस स्टेशन बिजनेस की जगह बन गए हैं'.

'पूरा पुलिस स्टेशन कमर्शियल गतिविधियों में शामिल'

कोर्ट ने यह भी कहा कि रसड़ा पुलिस स्टेशन के इंचार्ज और बलिया के SP ने कॉन्स्टेबल के पक्ष में ARTO को रिपोर्ट सौंपकर उसे बचाया था, जबकि ARTO ने उस गाड़ी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था और उसके ट्रांसफर पर रोक लगा दी थी. इस स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि पूरा पुलिस स्टेशन कमर्शियल गतिविधियों में शामिल है, जैसा कि अलगअलग अधिकारियों द्वारा दाखिल हलफनामे और उसमें कही गई बातों से साफ होता है.

11 अगस्त को मामले की अगली सुनवाई

ऐसे में कोर्ट ने 27 जुलाई के अपने आदेश में DGP को निर्देश दिया कि वो रसड़ा पुलिस स्टेशन में कथित तौर पर हो रही कमर्शियल गतिविधियों की जांच करें और वहां तैनात सभी पुलिस अधिकारियों और कॉन्स्टेबलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दें. कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 अगस्त की तारीख तय की है.

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Himachal Se