Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
केवल जंतर मंतर ही नहीं अब बड़ी कंपनियों में भी दिखेगा Gen Z का जलवा, बदल सकता है सालों पुराना नियम​

केवल जंतर मंतर ही नहीं अब बड़ी कंपनियों में भी दिखेगा Gen Z का जलवा, बदल सकता है सालों पुराना नियम​

Himachal Se 1 week ago

जंतरमंतर पर धरना देकर शिक्षा मंत्री तक को इस्तीफा देने पर मजबूर कर देने वाले 'जेन जी' की ताकत अब सिर्फ सड़कों या आंदोलनों तक सीमित नहीं रहने वाली है. सड़क पर अपनी एकजुटता का दम दिखाने के बाद, आज के ये युवा अब सीधे बड़ीबड़ी कंपनियों के एयरकंडीशंड बोर्डरूम में भी अपना जलवा बिखेरने को तैयार हैं.

दरअसल, सरकार कंपनियों से जुड़े सालों पुराने उस नियम में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है, जिसके लागू होते ही महज 18 साल के युवा भी किसी कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर या 'बॉस' की कुर्सी संभाल सकेंगे. एक संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि कंपनियों में मैनेजिंग डायरेक्टर और होलटाइम डायरेक्टर बनने की न्यूनतम उम्र 21 साल से घटाकर 18 साल कर दी जाए.

कानून की पुरानी उलझन सुलझाने की तैयारी

मौजूदा कंपनीज एक्ट के तहत भारत में कोई भी 18 साल का व्यक्ति अपनी कंपनी रजिस्टर कर सकता है, शेयर खरीद सकता है और यहां तक कि किसी कंपनी के बोर्ड में डायरेक्टर भी बन सकता है. समस्या तब आती है जब बात मैनेजिंग डायरेक्टर या होलटाइम डायरेक्टर जैसे बड़े कार्यकारी पदों की होती है. सेक्शन 196 के तहत इन पदों पर बैठने के लिए उम्र कम से कम 21 साल होनी चाहिए. नीति आयोग और रेगुलेटरी रिफॉर्म्स से जुड़ी उच्च स्तरीय समिति ने इस विसंगति को दूर करने का अहम सुझाव दिया था. कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय का भी स्पष्ट मानना है कि जब अमेरिका, जर्मनी, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े और विकसित देशों में ऐसी कोई उम्र की पाबंदी नहीं है, तो भारत में 18 साल के कानूनी रूप से बालिग युवा को इस जिम्मेदारी से क्यों रोका जाए.

उम्र से ज्यादा स्किल पर कंपनियों का फोकस

इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह आज का बदलता हुआ बिजनेस मॉडल है. आज कंपनियों को ऐसे विशेषज्ञों की सख्त जरूरत है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , साइबर सुरक्षा, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल कॉमर्स की गहरी समझ रखते हों. बिजनेस की दुनिया में ये खूबियां अक्सर पुराने और रिटायर हो चुके अधिकारियों के बजाय डिजिटल दौर में पलेबढ़े युवाओं में ज्यादा पाई जाती हैं. इसके अलावा, आज के दौर में कंपनियों के ग्राहकों और कर्मचारियों का एक बहुत बड़ा वर्ग 20 से 30 साल की उम्र का है. डिजिटल मीडिया, गेमिंग, फिनटेक और कंज्यूमर टेक जैसी कंपनियों में तो पूरी व्यावसायिक रणनीति ही युवाओं के इर्दगिर्द घूमती है. ऐसे में अगर बोर्ड रूम में बैठे लोग इस युवा आबादी की जरूरतों और व्यवहार से कटे रहेंगे, तो बाजार में टिके रहना मुश्किल हो जाएगा.

स्टार्टअप इकोसिस्टम का बढ़ता प्रभाव

इस नई सिफारिश के पीछे भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप कल्चर की भी बड़ी भूमिका है. आज कई युवा 20 साल की उम्र से पहले ही अपना सफल बिजनेस खड़ा कर रहे हैं. वेंचर कैपिटल की फंडिंग वाली कंपनियों में युवा फाउंडर्स के पास बड़े अधिकार होते हैं. ऐसे में उम्र की कानूनी सीमा उनके लिए एक गैरजरूरी रुकावट बन जाती है. हालांकि, शेयर बाजार और निवेशकों को इस संभावित बदलाव से घबराने की कोई जरूरत नहीं है. हमारा कॉर्पोरेट गवर्नेंस सिस्टम आज भी काफी सतर्क है. सिर्फ उम्र कम या ज्यादा होने से किसी को बोर्ड में जगह नहीं मिल जाती. रिलायंस इंडस्ट्रीज के बोर्ड में 28 साल के अनंत अंबानी की नियुक्ति के समय प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्मों द्वारा उठाए गए सवाल इसका सटीक उदाहरण हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। संस्थागत निवेशक आज भी उम्र से ज्यादा योग्यता, अनुभव और काम करने की क्षमता को ही परखते हैं.

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Himachal Se