Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
Vat Savitri Vrat Vidhi: 16 मई को है वट सावित्री पूजा, जानें व्रत के नियम और पूरी विधि विस्तार से यहां​

Vat Savitri Vrat Vidhi: 16 मई को है वट सावित्री पूजा, जानें व्रत के नियम और पूरी विधि विस्तार से यहां​

Himachal Se 6 days ago

Himachal Se:Vat Savitri Vrat Vidhi 2026: हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत की बड़ी महिमा बताई जाती है। कहते हैं इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ये व्रत साल में दो बार आता है।

एक बार ज्येष्ठ अमावस्या पर तो दूसरी बार ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन। लेकिन ज्येष्ठ अमावस्या वाला वट सावित्री व्रत ज्यादा लोकप्रिय है जो इस बार 16 मई 2026, शनिवार को पड़ रहा है। ये व्रत मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब और उड़ीसा की महिलाएं रखती हैं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इस व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा का विधान है। यहां हम आपको बताएंगे वट सावित्री व्रत रखा कैसे जाता है।

Vat Savitri Vrat Vidhi: 16 मई को है वट सावित्री पूजा, जानें व्रत के नियम और पूरी विधि विस्तार से यहां​

वट सावित्री व्रत कैसे रखा जाता है

  • वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और लाल, पीले या हरे रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इस दिन सुहागिन महिलाएं को सोलह शृंगार जरूर करना चाहिए।
  • सजने संवरने के बाद व्रत का संकल्प लें।
  • फिर सभी पूजा सामग्री को लेकर बरगद के पेड़ पर जाएं और वहां जाकर सबसे पहले बेड़ की जड़ में पानी डालें।
  • पेड़ के नीचे सावित्री और सत्यवान की प्रतिमा स्थापित करें।
  • बांस की एक टोकरी में सात प्रकार के अनाज जरूर रखें।
  • रोली, अक्षत, फूल और कुमकुम से वृक्ष और देवीदेवताओं की पूजा करें।
  • भोग में भीगे हुए चने और गुड़ जरूर रखें।
  • बांस के पंखे से सावित्रीसत्यवान और वट वृक्ष को हवा झलें।
  • इसके बाद वट वृक्ष की 7, 11 या 21 बार परिक्रमा करते हुए उस पर कलावा या कच्चा सूत लपेटें।
  • परिक्रमा करते समय अपने पति की लंबी आयु की कामना करें।
  • परिक्रमा के बाद पेड़ के नीचे बैठकर सावित्रीसत्यवान की कथा सुनें या पढ़ें।
  • कथा के अंत में धूपदीप से आरती करें और पूजा में हुई भूलचूक की क्षमा मांगें।
  • पूजा समाप्त होने के बाद सुहाग की सामग्री और दक्षिणा किसी ब्राह्मण या सुहागिन महिला को दान कर दें।
  • इसके बाद अपने घर के बड़ों और पति का पैर छूकर उनका आशीर्वाद जरूर प्राप्त करें।
  • इसके बाद प्रसाद में चढ़ाई गई चीजों को खाकर अपना व्रत खोल लें।
  • व्रत पूजा के बाद कभी भी खोला जा सकता है।
  • वैसे कई क्षेत्रों में महिलाएं वट सावित्री व्रत का पारण 7, 11 या 21 भीगे चने निगलकर करती हैं। इसके बाद आप सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं।
  • इस बात का ध्यान रखें कि पूजा से पहले अन्न भूलकर भी ग्रहण नहीं करना है। हालांकि आप फलाहारी भोजन ले सकते हैं।

वट सावित्री व्रत का पारण कब किया जाता है

वट सावित्री व्रत का पारण पूजा के बाद कभी भी किया जा सकता है। जैसे अगर आपने सुबह 11 बजे के करीब पूजा कर ली है तो इसके बाद आप अपना व्रत खोल सकती हैं। जो महिलाएं शाम में पूजा करती हैं तो वो शाम में ही व्रत खोलती हैं।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Himachal Se