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ब्लड टेस्ट से चल जाएगा शुरुआती कैंसर का पता, रिलायंस की स्ट्रैंड लाइफ साइंसेज को मिला पेटेंट​

ब्लड टेस्ट से चल जाएगा शुरुआती कैंसर का पता, रिलायंस की स्ट्रैंड लाइफ साइंसेज को मिला पेटेंट​

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जंग में एक बहुत बड़ी उम्मीद जागी है. रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी स्ट्रैंड लाइफ साइंसेज ने एक ऐसी तकनीक तैयार की है, जिससे केवल एक साधारण ब्लड टेस्ट के जरिए कैंसर की शुरुआती पहचान की जा सकेगी .

इस तकनीक के लिए कंपनी को भारत में पेटेंट भी मिल चुका है . यह खोज उन लाखों लोगों के लिए एक बड़ी राहत बन सकती है, जिन्हें इस जानलेवा बीमारी का पता तब चलता है जब वह खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी होती है . अब एक ब्लड सैंपल से न सिर्फ बीमारी बल्कि शरीर में उसके पनपने की जगह का भी सटीक पता लगाया जा सकेगा .

आम आदमी के लिए राहत की खबर

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनते ही मरीज के साथसाथ पूरा परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट जाता है. आंकड़ों की बात करें तो हर साल कैंसर के करीब 15 लाख नए मामले सामने आते हैं . सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि ज्यादातर मरीजों को इस बीमारी का पता तब लगता है, जब इलाज के विकल्प बेहद सीमित रह जाते हैं और ठीक होने की संभावना कम हो जाती है . ऐसे में यह नई तकनीक एक संजीवनी का काम कर सकती है. अगर बीमारी की पहचान पहले ही चरण में हो जाए, तो मरीजों के बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है . वर्तमान में जो जांच के तरीके मौजूद हैं, वे कुछ ही तरह के कैंसर को कवर कर पाते हैं और उन्हें बड़े पैमाने पर आम जनता तक पहुंचाना काफी मुश्किल है .

कैसे काम करेगी यह तकनीक

मेडिकल साइंस के नजरिए से यह एक बड़ी छलांग है. यह नया प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से सेलफ्री डीएनए विश्लेषण पर काम करता है . दरअसल, जब शरीर में कैंसर पनप रहा होता है, तो जीनोम के डीएनए पैटर्न में कुछ खास बदलाव होने लगते हैं, जिन्हें मिथाइलेशन कहा जाता है . स्ट्रैंड लाइफ साइंसेज की यह पेटेंटेड तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उच्च गुणवत्ता वाली जीनोम सीक्वेंसिंग का इस्तेमाल करके इन सूक्ष्म बदलावों को शुरुआत में ही पकड़ लेती है . इसका सीधा अर्थ यह है कि मरीज को शुरुआत में ही कई जटिल जांचों से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी. केवल खून की कुछ बूंदों से यह पता चल जाएगा कि कैंसर है या नहीं .

सस्ते इलाज की दिशा में बड़ा कदम

इस तकनीक का एक और बड़ा फायदा इसकी पहुंच है. इसे बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचाने के लिए अस्पतालों में किसी भारीभरकम और नए बुनियादी ढांचे को खड़ा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी . जीनोम सीक्वेंसिंग की लागत धीरेधीरे कम हो रही है, जिससे यह टेस्ट भविष्य में काफी किफायती साबित हो सकता है . बेंगलुरु स्थित यह कंपनी मूल रूप से भारतीय विज्ञान संस्थान से निकली है और इसका फोकस सटीक चिकित्सा पर है . कंपनी बायोइन्फॉर्मेटिक्स और आधुनिक लेबोरेटरी तकनीक के क्षेत्र में लंबा अनुभव रखती है . कंपनी के सीईओ रमेश हरिहरन का स्पष्ट मानना है कि भारत में कैंसर एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है . यह नया पेटेंट सटीक, एआईआधारित लिक्विड बायोप्सी टेक्नोलॉजी को हर व्यक्ति तक पहुंचाने के उनके संकल्प को और मजबूत करता है . स्ट्रैंड लाइफ साइंसेज वैश्विक स्तर पर फार्मास्यूटिकल और डायग्नोस्टिक कंपनियों के साथ मिलकर रिसर्च को भी आगे बढ़ा रही है .

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