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E20 पेट्रोल डालने से पहले पढ़ लें ये खबर! 'चींटियां, जंग और इंजन खराब' वाले दावों का सच आया सामने​

E20 पेट्रोल डालने से पहले पढ़ लें ये खबर! 'चींटियां, जंग और इंजन खराब' वाले दावों का सच आया सामने​

E20 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रहे भ्रम और भ्रामक दावों पर सरकार और देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों ने संयुक्त रूप से सफाई दी है. विशेषज्ञों ने कहा कि पेट्रोल टैंक पर चींटियां लगना, इंजन खराब होना, जंग लगना या गाड़ी के पुर्जों को नुकसान पहुंचना जैसे दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.

लोगों से अपील की गई है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें.

वर्षों की टेस्टिंग के बाद लागू हुआ E20

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद ऑटोमोबाइल कंपनियों के अधिकारियों ने बताया कि E20 पेट्रोल को रातोंरात लागू नहीं किया गया. इस कार्यक्रम पर कई वर्षों तक वैज्ञानिक अध्ययन, रिसर्च और व्यापक परीक्षण किए गए. इसके बाद ही सरकार ने चरणबद्ध तरीके से इसे पूरे देश में लागू किया. फिलहाल देश के 77 हजार से अधिक पेट्रोल पंपों पर BIS मानकों के अनुरूप E20 पेट्रोल उपलब्ध है.

पुरानी गाड़ियों पर भी नहीं मिला नुकसान का सबूत

मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर डॉ. राहुल भारती ने कहा कि कंपनी ने 2023 से पहले बनी E10 कारों पर भी E20 पेट्रोल का परीक्षण किया है. टेस्टिंग और सर्विस नेटवर्क से मिले आंकड़ों में कहीं भी ऐसा नहीं पाया गया कि E20 की वजह से इंजन, फ्यूल टैंक, पाइपलाइन या अन्य पुर्जों को कोई अतिरिक्त नुकसान हुआ हो. उन्होंने कहा कि करोड़ों वाहनों की सर्विसिंग के दौरान भी E20 से जुड़ी कोई असामान्य शिकायत सामने नहीं आई.

'चींटियां लगने' का दावा पूरी तरह भ्रामक

विशेषज्ञों ने साफ किया कि इथेनॉल में चीनी नहीं होती, इसलिए पेट्रोल टैंक पर चींटियां लगने जैसी बातें वैज्ञानिक रूप से सही नहीं हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऐसे दावों का कोई प्रमाण नहीं मिला है. टोयोटा किर्लोस्कर के अधिकारियों ने बताया कि वायरल हुए एक मामले की जांच में ईंधन में मिलावट और पानी की मौजूदगी पाई गई थी. वाहन से ईंधन निकालकर टैंक और फ्यूल लाइन की सफाई की गई, जिसके बाद गाड़ी सामान्य रूप से चलने लगी.

ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण के लिए अहम कदम

विशेषज्ञों के मुताबिक, E20 कार्यक्रम का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करना, कार्बन उत्सर्जन घटाना और किसानों के लिए इथेनॉल की मांग बढ़ाना है. उनका कहना है कि दुनिया के कई देशों में वर्षों से इथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफलतापूर्वक इस्तेमाल हो रहा है और भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है.

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