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जब गरीब बुढ़िया की मौत के बाद पढ़ी गई वसीयत तो गांववालो ने पकड़ लिया माथा नहीं हो रहा कानों पर यकीन- आखिर ये कैसे हो गया?​​​

जब गरीब बुढ़िया की मौत के बाद पढ़ी गई वसीयत तो गांववालो ने पकड़ लिया माथा नहीं हो रहा कानों पर यकीन- आखिर ये कैसे हो गया?​​​

हा जाता है कि किसी को भी देखकर उसकी हस्ती की थाह नहीं लगाई जा सकती है. हम किसी शख्स के बारे में उतना ही जानते हैं, जितना दो-चार मुलाकातों में उसे समझ पाते हैं. इसके अलावा वो कैसा है और उसके पास क्या है, इस बात की खबर हमें नहीं होती है.

ऐसे में जब कुछ ऐसा हो जाए, जो हमने बिल्कुल न सोचा हो, तो चौंकना लाज़मी है.

जिस आदमी के पास संपत्ति ज्यादा होती है, वो अपनी वसीयत अक्सर पहले ही बना लेते हैं और इसे उनकी मौत के बाद ही खोलकर पढ़ा जाता है. हालांकि आज हम बात एक गरीब महिला की वसीयत की करेंगे. महिला का घर बुरी हालत में था और बगीचे की भी साफ-सफाई नहीं होती थी. मौत के बाद जब उसकी वसीयत पढ़ी गई, तो लोगों को अपने कानों पर यकीन नहीं हुआ. वे आपस में खुसुर-फुसुर करने लगे कि आखिर ये हो कैसे सकता है.

गरीब बुढ़िया की वसीयत में था क्या?
हिल्दा लेवी नाम की एक महिला केंट के व्हिसिलटेबल में रहती थी. वो 1970 के बने हुए एक सेमी डिटैच्ड घर में रहती थी, जिसकी मौत 98 साल की उम्र में हो गई. जब उसकी वसीयत पढ़ी गई, तो उसमें कुल 1.4 मिलियन पाउंड यानि लगभग 16 करोड़ रुपये का ब्यौरा था. इसमें से साढ़े 5 करोड़ रुपये उसके दोस्तों और कैंटरबरी अस्पताल को दिए गए थे. इसके अलावा करीब 3 करोड़ रुपये लंदन के Whitstable Healthcare and Moorfields Eye Hospital में उसके दोस्तों के नाम किए गए थे. चैरिटी में दिए गए पैसों के बारे में सुनकर लोग दंग रह गए क्योंकि महिला का घर काफी बुरी हालत में था, जिसे देखकर बिल्कुल नहीं लगता था कि वो करोड़ों की मालकिन है.

आखिर कहां से आया इतना पैसा?
जब हिल्दा लेवी के बारे में पता किया गया, तो जानकारी सामने आई कि वो जर्मनी से इंग्लैंड एक रिफ्यूजी के तौर पर 1930 के दशक में आई थी. उसके परिवार की मौत होलोकॉस्ट में हो चुकी थी. वो अनाथ थी, जिसे इंग्लैंड में एलन जेफरी नाम की महिला ने एडॉप्ट किया था. वो डॉक्टर फ्रीडरिक और मिसेज़ इर्मा लेवी की बेटी थी. उसने इंग्लैंड में अपना पूरा जीवन जिया. बात रही उसके पैसों की, तो पता चला कि ये उसके एक अंकल की प्रॉपर्टी में मिला हिस्सा था, जो अमेरिका में जाकर बस गए थे. उन्होंने अपनी 300 करोड़ से भी ज्यादा संपत्ति को भाई-बहनों के परिवारों और दूर के रिश्तेदारों में बांट दिया था. हिल्दा को भी वही प्रॉपर्टी मिली थी.

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