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बदलते दौर में साहित्य की भूमिका और बढ़ी : साहित्यकार नंद भारद्वाज

जयपुर, 01 जून (हि.स.)। कलमकार मंच और पिंकसिटी प्रेस क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पुस्तक लोकार्पण समारोह में साहित्यकारों ने बदलते समय में साहित्य की भूमिका, आत्मसमीक्षा और रचनात्मक मौलिकता पर गंभीर चर्चा की।

कार्यक्रम में अनिल सक्सेना 'ललकार' की पुस्तक '21वीं सदी का राजस्थान साहित्यिक आंदोलन', साधना जोशी 'प्रधान' के गीत-गीतिका संग्रह 'ठूंठ पर खिले पलाश' तथा इंदु सिन्हा 'इंदु' के कहानी संग्रह 'उन दिनों प्रेम' का लोकार्पण किया गया।

मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार नंद भारद्वाज ने कहा कि लेखक को अपनी रचना का सबसे कठोर पाठक होना चाहिए। आत्मसमीक्षा से रचना अधिक परिष्कृत और प्रभावशाली बनती है। अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ आलोचक दुर्गा प्रसाद अग्रवाल ने साहित्य की सभी विधाओं के अध्ययन पर जोर देते हुए कहा कि परंपरा सृजन की आधारभूमि है तथा एआई के दौर में साहित्य की मौलिकता को बचाए रखना बड़ी चुनौती है।

वरिष्ठ लेखक-पत्रकार विनोद भारद्वाज ने साहित्यिक विधाओं के निरंतर विकास पर प्रकाश डाला, जबकि राजाराम भादू ने साहित्य को समाज के यथार्थ का दस्तावेज बताते हुए कलमकार मंच की भूमिका की सराहना की। वरिष्ठ शायर लोकेंद्र कुमार सिंह 'साहिल' ने कविता में भाव और विचार के संतुलन तथा छंद की महत्ता पर बल दिया।

कार्यक्रम में अनिल सक्सेना, साधना जोशी और इंदु सिन्हा ने अपनी पुस्तकों एवं लेखन-दृष्टि पर विचार रखे। फारूक अफरीदी, कविता मुखर और प्रेमचंद गांधी ने पुस्तकों की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए उनकी विषयवस्तु और साहित्यिक महत्व पर प्रकाश डाला।

समारोह में निशांत मिश्रा, मुकेश मीणा, राजकुमार शर्मा, चरणसिंह पथिक, गजेन्द्र एस. श्रोत्रिय सहित अनेक साहित्यकारों ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में साहित्य, कविता, कहानी, छंद, मुक्तछंद और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे विषयों पर सार्थक विमर्श हुआ। अंत में वरिष्ठ साहित्यकार नवल पाण्डे ने आभार व्यक्त किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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