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एमसीबी : मानसून को लेकर अलर्ट मोड पर जिला प्रशासन

नेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, 02 जून (हि.स.)। आगामी मानसून-2026 के मद्देनजर जिला प्रशासन ने बाढ़, अतिवृष्टि और किसी भी संभावित प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए अपनी तैयारियां पूरी तरह तेज कर दी हैं।

छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत कलेक्टर के निर्देश पर मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सभी विभागों को अलर्ट कर दिया गया है। इसके लिए कलेक्ट्रेट परिसर के कक्ष क्रमांक-14 में एक जिला स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जो मानसून की पूरी अवधि के दौरान 24 घंटे सक्रिय रहेगा। आपातकालीन स्थिति में नागरिक नियंत्रण कक्ष के दूरभाष क्रमांक 07771-299055 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा पुलिस सहायता के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन डायल-100 और डायल-112 की सेवाएं भी निरंतर उपलब्ध रहेंगी।

इस बार प्रशासन का विशेष ध्यान बाढ़ प्रभावित और पहुंचविहीन क्षेत्रों में समय रहते बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने पर है। इन संवेदनशील इलाकों में खाद्यान्न, नमक, केरोसीन और जीवन रक्षक दवाइयों का अग्रिम भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सकों की 'क्विक रिस्पांस टीम' का गठन किया है, जो किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मौके पर पहुंचेगी। साथ ही सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम (सर्पदंश की दवा) व अन्य जरूरी दवाएं सुरक्षित रख ली गई हैं। जलजनित बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के कुओं और हैंडपंपों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया जा रहा है। बाढ़ की स्थिति में लोगों को ठहराने के लिए सुरक्षित स्कूलों, धर्मशालाओं और शासकीय भवनों को राहत शिविर के रूप में चिन्हित कर लिया गया है, जहां अतिरिक्त शौचालय और सैनिटाइजेशन की व्यवस्था रहेगी।

नदियों और जलाशयों के बढ़ते जलस्तर पर नजर रखने के लिए जल संसाधन विभाग को विशेष जिम्मेदारी दी गई है। निर्देश हैं कि यदि किसी बांध या जलाशय से पानी छोड़ने की स्थिति बनती है, तो निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को कम से कम 12 घंटे पहले सूचना दी जाए, ताकि वे सुरक्षित स्थानों पर जा सकें। शहरी क्षेत्रों में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को नालों की सफाई करने, संवेदनशील जगहों पर पानी निकालने वाले पंप लगाने और आंधी-तूफान के दौरान गिरने वाले असुरक्षित पेड़ों व होर्डिंग्स को हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

स्थानीय स्तर पर होने वाली दैनिक बारिश के आंकड़े भू-अभिलेख शाखा की अधीक्षक उमंग जैन (7049427006) को सुबह 8 बजे तक और किसी भी प्रकार की क्षति की रिपोर्ट राहत शाखा की प्रभारी आशीष देवी (9713700311) को अनिवार्य रूप से भेजी जाएगी। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मानसून के दौरान जनहानि और संपत्ति के नुकसान को शून्य पर लाने के लिए सभी सरकारी महकमों को आपसी समन्वय, पूरी सतर्कता और कड़ी जवाबदेही के साथ काम करना होगा। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह

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