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जवाहर बाग की 10वीं बरसी पर बोली अर्चना द्विवेदी अभी तक नहीं मिला सम्मान, मुख्यमंत्री दें शहीद सेवा मेडल

जवाहर बाग की 10वीं बरसी पर बोली अर्चना द्विवेदी अभी तक नहीं मिला सम्मान, मुख्यमंत्री दें शहीद सेवा मेडल

थुरा, 02 जून(हि.स.)। जवाहर बाग हिंसा की 10वीं बरसी पर तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना द्विवेदी ने मंगलवार गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि घटना के एक दशक बाद भी उनके पति को आधिकारिक रूप से शहीद का दर्जा नहीं मिला है।

उन्होंने कहा कि समाज और कानून व्यवस्था की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अधिकारी को अब तक वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे वास्तविक हकदार हैं। अर्चना द्विवेदी ने कहा कि उनके पति ने कर्तव्य निभाते हुए उपद्रवियों का डटकर सामना किया और वीरगति प्राप्त की। हर वर्ष उनकी बरसी पर नेता और प्रशासनिक अधिकारी श्रद्धांजलि देने आते हैं तथा परिवार को सम्मान दिलाने का आश्वासन भी देते हैं लेकिन आज तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

गौरतलब है कि 2 जून 2016 को मथुरा के जवाहर बाग में रामवृक्ष यादव के नेतृत्व वाले स्वाधीन भारत सुभाष सेना समूह ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा था इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद जब पुलिस और प्रशासन अतिक्रमण हटाने पहुंचा तो उपद्रवियों की हिंसक घटना में तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और फरह थानाध्यक्ष संतोष कुमार यादव की मौत हो गई थी। पूरे घटनाक्रम में दो पुलिस अधिकारियों समेत कुल 29 लोगों की जान गई थी, मृतकों में 27 सत्याग्रही भी शामिल थे। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी। जवाहर बाग कांड की दसवीं बरसी पर अर्चना द्विवेदी के बयान के बाद एक बार फिर इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।

सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले अधिकारियों को अब तक आधिकारिक शहीद का दर्जा क्यों नहीं मिला। स्थानीय नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का कहना है कि जिन पुलिस अधिकारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना कानून व्यवस्था बहाल करने का प्रयास किया उनके बलिदान का सम्मान केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस मामले में शीघ्र निर्णय लेकर दिवंगत अधिकारियों को उचित सम्मान प्रदान किया जाए। अर्चना द्विवेदी का कहना है कि उनके परिवार को आज भी उस सम्मानजनक निर्णय का इंतजार है जिसकी उम्मीद उन्हें वर्षों से दिलाई जाती रही है। उन्होंने सरकार से संवेदनशीलता दिखाते हुए इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने की अपील की है।

हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार

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