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पंचायत अधिकारों की अनदेखी पर भड़के सरपंच, हाेगा चरणबद्ध आंदोलन

पंचायत अधिकारों की अनदेखी पर भड़के सरपंच, हाेगा चरणबद्ध आंदोलन

15 दिन में समाधान नहीं तो चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी

धमतरी, 29 मई (हि.स.)। धमतरी जिले के कुरुद ब्लाॅक में शुक्रवार काे सरपंच संघ कुरुद की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में पंचायत अधिकारों की उपेक्षा, विकास कार्यों में हो रही देरी और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर गहरा आक्रोश देखने को मिला।

बैठक में विभिन्न ग्राम पंचायतों से पहुंचे सरपंचों और प्रतिनिधियों ने पंचायतों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर नाराजगी जताई और कहा कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। बैठक में लगभग 76 सरपंच उपस्थित रहे और सभी ने पंचायत हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया।

बैठक की अध्यक्षता कर रहे सरपंच संघ कुरूद के अध्यक्ष हरिशंकर साहू ने कहा कि पंचायतों को अधिकार तो दिए गए हैं, लेकिन व्यवहारिक रूप से उन्हें स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर नहीं मिल रहा है। लगातार उपेक्षा से ग्रामीण विकास प्रभावित हो रहा है। सरपंच संघ जिलाध्यक्ष टिकेश साहू ने कहा कि पंचायत राज व्यवस्था लोकतंत्र की नींव है, लेकिन वर्तमान हालात में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका केवल औपचारिकता तक सीमित होती जा रही है। उन्होंने पंचायतों को सम्मान और अधिकार देने की मांग की।

जयमित्र साहू गोजी ने कहा कि गांवों के विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जिससे आम जनता में भी नाराजगी बढ़ रही है। संरक्षक पूर्णिमा साहू ने पंचायत प्रतिनिधियों से एकजुट होकर पंचायत स्वायत्तता की रक्षा करने का आह्वान किया। वहीं पन्ना चंद्राकर ने विकास कार्यों में हो रही देरी और प्रशासनिक उदासीनता पर चिंता जताई।

सचिव चेतन देवांगन ने कहा कि पंचायतों से जुड़े कार्यों की प्रक्रिया अनावश्यक रूप से जटिल बना दी गई है, जिससे सरपंचों और ग्रामीणों दोनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मीडिया प्रभारी योगेश साहू ने कहा कि पंचायतों की समस्याओं को शासन और प्रशासन तक मजबूती से पहुंचाया जाएगा तथा ग्रामीण विकास के मुद्दों पर लगातार आवाज उठाई जाएगी।

उपाध्यक्ष देशांत सिंहा एवं पूरण धृतलहरे, महासचिव देवीचरण चंद्राकर, संगठन सचिव ज्योति मांडवी एवं पुष्पलता साहू सहित उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने पंचायत अधिकारों और विकास कार्यों को लेकर एक स्वर में चिंता व्यक्त की।

बैठक में सर्वसम्मति से आरोप लगाया गया कि पंचायतों से संबंधित निर्माण कार्यों, कार्यादेशों, मनरेगा अंतर्गत संचालित योजनाओं तथा अन्य विकास कार्यों के मूल्यांकन और भुगतान की प्रक्रिया अत्यंत धीमी गति से संचालित हो रही है। इसके कारण ग्राम स्तर पर विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और श्रमिकों को समय पर मजदूरी नहीं मिल पा रही है। सरपंच संघ ने मांग की कि समस्त योजनाओं के क्रियान्वयन एवं भुगतान प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाया जाए।

बैठक में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया कि राशन कार्ड, पेंशन प्रकरण और जॉब कार्ड निर्माण जैसे पंचायत स्तर के कार्य जनप्रतिनिधियों की जानकारी एवं अनुशंसा के बिना विभागीय कर्मचारियों द्वारा सीधे किए जा रहे हैं। सरपंचों ने इसे पंचायत राज व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत बताया। प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत कार्यकाल के लगभग 16 माह बीत जाने के बाद भी जिलास्तर पर सरपंचों की कोई औपचारिक बैठक आयोजित नहीं की गई है।बैठक के अंत में सरपंच संघ कुरूद ने प्रशासन को 15 दिन की समयसीमा देते हुए मांग की कि सभी समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जाए। अन्यथा चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

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